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ज्यादा तीर्थयात्री पहुंचे, चरमराए तमाम बंदोबस्त

उत्तराखंड में सभी सड़क मार्गों में होटल, धर्मशालाएं और सरकारी अतिथि गृह भरे हुए हैं।

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उत्तराखंड के चारों धामों में 15 दिन में छह लाख तीर्थयात्री आ चुके हैं जो एक रेकार्ड है। 10 साल में इतने तीर्थयात्री कभी नहीं आए। तीर्थयात्रियों की इस आवाजाही से सरकारी और निजी क्षेत्रों की सारी व्यवस्थाएं धरी-की-धरी रह गई हैं। उत्तराखंड में सभी सड़क मार्गों में होटल, धर्मशालाएं और सरकारी अतिथि गृह भरे हुए हैं। 20 मई तक हेलिकाप्टर की सभी सेवाओं में सीट उपलब्ध नहीं हैं।

केदारनाथ धाम में तो इतनी अधिक भीड़ है कि सोनप्रयाग गुप्तकाशी गौरीकुंड से ही तीर्थयात्रियों को लौटाया जा रहा है। केदारनाथ के दर्शन न करने वाले श्रद्धालु बेहद निराश हैं। उदयपुर के नाथद्वारा क्षेत्र से आए तीर्थयात्रियों के एक दल के सदस्यों ज्योति एवं राजकुमार ने बताया कि उन लोगों को सोनप्रयाग से वापस भेज दिया गया।

उनका कहना है कि उन्होंने जब केदारनाथ के लिए हेलिकाप्टर सेवा केंद्र से संपर्क साधा तो उन्हें बताया गया कि 20 मई तक हेलिकाप्टर की सभी सेवाएं बुक हैं। उन्होंने बताया कि केदारनाथ के लिए सोनप्रयाग क्षेत्र में रुके हुए तीर्थ यात्रियों को जिला प्रशासन ने बताया कि तीन दिन बाद केदारनाथ जाने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया कि होटल में एक कमरे का एक बिस्तर का किराया पांच हजार रुपए है।

राजस्थान से आए निरंजन टेलर ने बताया कि यमुनोत्री में खच्चर वाले 11 हजार रुपए तथा पालकी वाले 21 हजार रुपए किराया वसूल रहे हैं। उनका कहना है कि रास्ते में कहीं भी शौचालय, स्वास्थ्य केंद्रों या पूछताछ केंद्रों की ढंग से व्यवस्था नहीं है। जब हम चार धाम यात्रा के यमुनोत्री क्षेत्र में गए तो वहां पर रास्ता भटक गए। कोई भी सरकारी मुलाजिम रास्ता बताने को तैनात नहीं था। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री जाने तीर्थयात्री चारों धाम की यात्रा से लौट कर आ रहे हैं और सड़क में अपना सामान उठा रहे हैं क्योंकि होटल धर्मशाला सब भरे हुए हैं। सड़क में ही उन्हें अपना सामान इकट्ठा कर कर छोटे टेंपो ट्रैवलर में भर कर जाना पड़ रहा है।

इनमें कई यात्री केदारनाथ के दर्शन किए बिना ही लौट रहे हैं। राजस्थान के नाथद्वारा उदयपुर क्षेत्र से यात्रियों का जत्था वापस आया है। इन यात्रियों ने बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री के दर्शन तो कर लिए परंतु केदारनाथ में भीड़ होने के कारण इन्हें लौटना पड़ रहा है। मूसलाधार बारिश और तूफान तीर्थ यात्रियों के लिए जी का जंजाल बने हुए हैं। 15 दिन में 39 तीर्थयात्री स्वास्थ्य कारणों से अपनी जान गंवा बैठे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने चार धाम यात्रा की पूरी तैयारी की है। श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक हो गई है और हम उनके लिए इंतजाम युद्ध स्तर पर कर रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे एक साथ तीर्थयात्रा में ना आएं बल्कि रुक-रुक कर आएं क्योंकि पूर्णबंदी के कारण चार धाम यात्रा दो साल बाद पूरी तरह से खोली गई है इसलिए संख्या एकदम बढ़ गई है। चिकित्सकों की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जा रहे हैं।

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