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‘धर्म हमारे बीच कभी नहीं आया’ कहकर भावुक हो गया दिल्ली अग्निकांड में मरे मुशर्रफ का दोस्त मोनू, कहा अली के बच्चे अब मेरे बच्चे हैं

मामले में अग्रवाल ने बताया, ‘हमारे घर एक ही गली में हैं। हम घंटों बात करते थे। हम हर बात पर चर्चा करते थे, हमारे बीच में कुछ भी छुपा हुआ नहीं था। हम सुख-दुख में एक साथ रहते थे।’ उन्होंने कहा, ‘मुशर्रफ मेरे लिए भाई से बढ़कर था। मजहब हमारे बीच कभी नहीं आया।'

Author नई दिल्ली | Updated: December 10, 2019 4:57 PM
दिल्ली के आज मंडी में आग से 43 की मौत हो गई। फोटो- इंडियन एक्सप्रेस

दिल्ली के अनाज मंडी बाजार में लगी भीषण आग में फंसे मुशर्रफ अली की अपने दोस्त से आखिरी बार फोन पर की गई बातचीत की रिकॉर्डिंग सामने आने आई है। इसके सामने आने के बाद कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए। अग्निकांड में जान गवांने वाले अली के बचपन के 33 वर्षीय दोस्त मोनू अग्रवाल ने सोमवार (09 दिसंबर) को कहा कि उनकी अली के साथ आखिरी बातचीत ‘संयोग से रिकॉर्ड’ हो गई। बता दें कि फोन पर की गई बातचीत को बाद में टीवी चैनलों ने प्रसारित किया था और इसे सोशल मीडिया पर साझा भी किया गया है।

अली-मोनू परिवार का रखना ध्यानः बता दें कि अली की जहरीले धुएं के कारण मौत हो गई। उन्होंने अग्रवाल से उनकी मौत के बाद उनके परिवार–बुजुर्ग मां, पत्नी और आठ साल से कम उम्र के दो बच्चों– का ध्यान रखने को कहा था। सोमवार को अग्रवाल, अली की मां के साथ उनका शव लेने के लिए दिल्ली आए हैं। इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। मामले की जांच चल रही है और बिल्डिंग के मालीक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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संयोग से आखिरी कॉल हुआ रिकॉर्ड-मोनूः पूछा गया कि उन्होंने क्या फोन कॉल जानबूझकर रिकॉर्ड की थी तो अग्रवाल ने कहा, ‘मैंने हमारी बातचीत कभी भी रिकॉर्ड नहीं की। यह संयोग से हो गई थी। शायद मेरी उंगली रिकॉर्डिंग बटन से टच हो गई होगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे खुद इसकी जानकारी फोन कॉल कट होने के बाद आए नोटिफिकेशन से मिली।’ बता दें कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले अली और अग्रवाल अच्छे और बुरे वक्त के साथी थे।

ईद और दिवाल मनाते थे साथ- मोनूः मोनू अग्रवाल ने बताया, ‘हमारे घर एक ही गली में हैं। हम घंटों बात करते थे। हम हर बात पर चर्चा करते थे, हमारे बीच में कुछ भी छुपा हुआ नहीं था। हम सुख-दुख में एक साथ रहते थे।’ उन्होंने कहा, ‘मुशर्रफ मेरे लिए भाई से बढ़कर था। मजहब हमारे बीच कभी नहीं आया। ईद पर, उनका परिवार हमारी मेहमान नवाजी करता था और दिवाली पर मैं।’

अली के बच्चे अब मेरे बेटे हैं- मोनूः मामले में मीडिया से बात करते हुए मोनू काफी भावुक हो गया था। अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश करते हुए उसने कहा, ‘उनके बच्चे अब मेरे बच्चे हैं। मैंने निजी कारणों से शादी नहीं की। भगवान यह जानता था कि इन बच्चों को मेरी जरूरत है, शायद इसलिए भगवान ने मुझे अविवाहित रखा।’ अग्रवाल ने बताया कि वह जब आठ साल के थे तो उनके पिता का निधन हो गया था। इसलिए वह बिना बाप की औलाद का दर्द समझते हैं।

मेरा जितना हैसियत है, दोनों परिवार का पेट पालूंगा- मोनूः अली के बारे में बोलते हुए मोनू ने कहा, ‘अली अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता का निधन छह महीने पहले ही हुआ था… वह छुट्टी पर थे और शुक्रवार (06 दिसंबर) को दिल्ली आए थे।’ अग्रवाल ने बताया, ‘मेरा छोटा सा कारोबार है। मुझे धन नहीं चाहिए। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वह मुझे बस इतना दे कि दोनों परिवारों का पेट भर जाए। मैं किसी भी तरह से काम चला लूंगा। मैं आखिरी सांस तक, मेरे बस में जो भी होगा, करूंगा।’ बता दे कि बिजनौर के नगीना में उनकी बर्तनों की दुकान है।

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