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रास में ‘ललित मोदी’ मुद्दे पर गतिरोध कायम, विपक्ष सुषमा के इस्तीफ़े पर अड़ा

ललित मोदी विवाद और व्यापमं घोटाला को लेकर राज्यसभा में आज लगातार तीसरे दिन भी गतिरोध जारी रहा जिसमें विपक्ष जहां विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है..

Author July 23, 2015 3:13 PM
विपक्ष ललित मोदी के मुद्दे पर सरकार से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे की मांग पर अड़ी है। (फोटो-पीटीआई)

ललित मोदी विवाद और व्यापमं घोटाला को लेकर राज्यसभा में आज लगातार तीसरे दिन भी गतिरोध जारी रहा जिसमें विपक्ष जहां विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है वहीं सत्ता पक्ष ने किसी के इस्तीफे की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए तुरंत चर्चा शुरू करने की मांग की। हंगामे के कारण कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर विपक्ष की ओर से यह मुद्दा फिर उठाया गया। सदन में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि उन्होंने कार्यस्थगन का एक नोटिस दिया है। उनके इतना कहते ही सत्ता पक्ष के कई सदस्य खड़े होकर अपना विरोध जताने लगे। सत्ता पक्ष के सदस्यों का कहना था कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है और उसे तुरंत चर्चा शुरू करनी चाहिए।

संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष रोज ही एक ही मुद्दे पर नोटिस दे रहा है। लेकिन जब चर्चा की बात आती है तो वह पीछे हट जाता है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों को तुरंत चर्चा शुरू करने की चुनौती दी। इस बीच विपक्ष के सदस्य भी सत्ता पक्ष के सदस्यों का विरोध करने लगे।

हंगामे को शांत कराने का प्रयास करते हुए उपसभापति पी जे कुरियन ने कहा कि विपक्ष ने पहले भी नियम 267 के तहत कार्यस्थगन नोटिस दिए थे। इन नोटिस पर मॉनसून सत्र के पहले दिन आसन की ओर से चर्चा की अनुमति दी गयी थी। कल भी इस तरह के नोटिस पर आसन ने विपक्ष और सत्तापक्ष के सदस्यों की राय जानी थी।

कुरियन ने कहा कि जब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों चर्चा चाहते हैं तो फिर सदन में चर्चा क्यों नहीं करायी जा सकती। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कल जो नोटिस दिया था उसमें एक शर्त या कैविएट जोड़ा गया था कि संबंधित मंत्री का इस्तीफा हो। उन्होंने कहा कि वह इस शर्त को लागू करने की स्थिति में नहीं हैं। आसन इस मामले में कुछ नहीं कर सकता और वह सिर्फ चर्चा की अनुमति दे सकता है।

इसी बीच विपक्ष के सदस्यों ने यह मांग शुरू कर दी कि जब तक संबंधित मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, सदन में चर्चा नहीं हो सकती। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि इस मुद्दे पर किसी का इस्तीफा नहीं होगा। सरकार चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को उससे भागना नहीं चाहिए।

इसके बाद सदन के नेता अरूण जेटली ने व्यवस्था के प्रश्न के नाम पर एक मुद्दा उठाते हुए कहा कि आनंद शर्मा ने आज जो नोटिस दिया है, उसमें कोई शर्त नहीं लगायी गयी है। उसमें केवल चर्चा की बात की गयी है और सरकार चर्चा के लिए तैयार है।

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने जेटली की बात पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह विशेषाधिकार हनन से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सवाल किया कि जब किसी सदस्य ने आसन को कोई नोटिस दिया हो तो वह सरकार या सदन के नेता के पास कैसे पहुंच गया। उन्होंने आसन से कहा कि इस मामले में वह सदस्यों के विशेषाधिकार की रक्षा करें।

इस पर जेटली ने सदन के नियमों 223 और 224 का हवाला देते हुए कहा कि सदन में दिए जाने वाले हर नोटिस को हर सदस्य तक वितरित किए जाने की बात की गयी है। उन्होंने येचुरी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि माकपा नेता को सदन के कामकाज संबंधी नियमों से अवगत होना चाहिए।

इसी बीच कांग्रेस के आनंद शर्मा और येचुरी ने भी अपनी बात रखने का प्रयास किया लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण उनकी बात सुनी नहीं जा सकी। हंगामे के कारण उपसभापति कुरियन ने बैठक 11 बजकर 25 मिनट पर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

गौरतलब है कि इसी मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण मानसून सत्र के शुरूआती दो दिन भी उच्च सदन में गतिरोध बना रहा।

एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे बैठक शुरू होने पर भी सदन में वही नजारा दिखा। सभापति हामिद अंसारी ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने का ऐलान किया, विपक्षी सदस्यों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे की मांग उठाई। तब सदन में सुषमा मौजूद थीं।

कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सदन का समय बहुमूल्य है लेकिन हमारी मांग भी गलत नहीं है।
सभापति ने प्रश्नकाल के लिए सूचीबद्ध पहला प्रश्न पूछने के लिए कहा। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इस प्रश्न का जवाब देने लगे लेकिन हंगामे के कारण उनकी बात सुनी नहीं जा सकी। हंगामा कर रहे कुछ सदस्यों के हाथों में पोस्टर थे। सभापति ने उनसे पोस्टर न दिखाने को कहा। कुछ सदस्य आसन की ओर आने लगे और सभापति ने उन्हें वापस अपने स्थानों पर जाने के लिए कहा।

अंसारी ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। अपनी अपील का असर न होते देख उन्होंने 12 बज कर पांच मिनट पर बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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