सोमवार (20 जुलाई 2026) से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इस सत्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोदन विधेयक (FCRA Amendment Bill) समेत कुल पांच नए विधेयक पेश कर सकती है। इनमें जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाने वाला एक विधेयक भी शामिल है।

संसद के इस सत्र के एजेंडे में ‘परिसीमन पैकेज’ (Delimitation Package) को शामिल नहीं किया गया है। इस पैकेज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘नारी शक्ति अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) है। यह विधेयक पहले लोकसभा में पारित नहीं हो सका था क्योंकि संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में एनडीए सरकार सफल नहीं रही थी।

परिसीमन पैकेज एजेंडे में क्यों शामिल नहीं?

सूत्रों के अनुसार, इस ‘परिसीमन पैकेज’ को आगे बढ़ाने के लिए पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की मंजूरी की जरूरत होगी। इसके बाद इसे दोबारा लोकसभा में पेश किया जाएगा। आपको बता दें कि यह संविधान संशोधन से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे पारित कराने के लिए सदन में कुल बहुमत (Absolute Majority) के साथ-साथ विशेष बहुमत (Special Majority) भी जरूरी होगा। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर शुक्रवार को होने वाली एनडीए नेताओं की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill) का उद्देश्य विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करना है। इसे मानसून सत्र में विचार और पारित करने के लिए लिस्ट किया गया है। यह कानून विदेशी चंदे और विदेशी आतिथ्य (Foreign Hospitality) को स्वीकार करने तथा उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है ताकि ऐसे विदेशी धन या सुविधाओं का प्रवाह राष्ट्रीय हित, सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले। यह विधेयक 25 मार्च को संसद में पेश किया गया था।

‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पर चर्चा

संसद के एजेंडे के अनुसार, ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ भी इस सत्र में प्रमुख रूप से चर्चा के लिए आएगा। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन बाद में इसे संसद के दोनों सदनों की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति (Joint Committee) के पास भेज दिया गया था। अब इस समिति की रिपोर्ट मानसून सत्र के दौरान सदन में पेश की जाएगी और उस पर विचार किया जाएगा।

संसद के एजेंडे के अनुसार, ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ भी इस सत्र में प्रमुख रूप से चर्चा के लिए आएगा। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन बाद में इसे संसद के दोनों सदनों की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति (Joint Committee) के पास भेज दिया गया था। अब इस समिति की रिपोर्ट मानसून सत्र के दौरान सदन में पेश की जाएगी और उस पर विचार किया जाएगा।

मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले नए विधेयकों में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (जिसमें 2023 में संशोधन किया गया था) की धारा 13 (3) में और संशोधन करने वाला एक विधेयक भी शामिल है। इसका मकसद जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना है।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक 2026 भी पेश किया जाएगा। इसका मकसद इस विषय पर पहले जारी किए गए अध्यादेश (Ordinance) की जगह नया कानून लाना है।

सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश करेगी। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के सॉवरेन डेट मार्केट (सरकारी ऋण बाजार) को और मजबूत बनाना, स्थिर वैश्विक पूंजी निवेश को आकर्षित करना और बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना है। सरकार का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में रुकावट जैसी मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए यह कदम जरूरी है।

विधायी कार्यसूची में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2026 भी शामिल है। इसके अलावा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSME) अधिनियम 2006 में संशोधन से जुड़ा एक विधेयक भी लाया जाएगा। इसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र के अनुरूप कानून को अपडेट करना और इस क्षेत्र में कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है।