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मॉनसून की बेरुखी से सूखे का खतरा

कृषि संकट व किसानों की आत्महत्या से जूझ रहे देश के लिए आगे और बुरी खबरें हैं। इस साल मॉनसून के ‘कमजोर’ रहने की आशंका है जिससे देश में सूखा पड़ सकता है...

Author June 3, 2015 8:51 AM
प्रतीकात्मक चित्र

कृषि संकट व किसानों की आत्महत्या से जूझ रहे देश के लिए आगे और बुरी खबरें हैं। इस साल मॉनसून के ‘कमजोर’ रहने की आशंका है जिससे देश में सूखा पड़ सकता है।

केंद्रीय भूविज्ञान मंत्री हर्षवर्द्धन ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे भारी दिल से कहना पड़ रहा है कि हमारे संशोधित अनुमान के मुताबिक भारत में 88 फीसद बारिश होगी जो चार फीसद ज्यादा या कम भी रह सकती है।’ मौसम विभाग ने अनुमान को संशोधित कर 93 फीसद से 88 फीसद दीर्घावधि औसत किया है जिसमें देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के सबसे ज्यादा प्रभावित रहने की आशंका है।

भारतीय मौसम विभाग ने अप्रैल में अनुमान व्यक्त किया था कि मॉनसूनी बारिश औसतन 93 फीसद रहेगी जो ‘सामान्य से कम’ श्रेणी में आती है। अब 88 फीसद अनुमान के साथ मॉनसून को ‘कमजोर’ रहने की श्रेणी में रखा गया है।

मंत्री ने कहा, ‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि अनुमान सही हैं। लेकिन इस बार हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि संशोधित अनुमान सही नहीं हों।’

यह पूछने पर कि क्या यह सूखा वर्ष हो सकता है तो हर्षवर्द्धन ने कहा कि उनका विभाग केवल मौसम के बारे में अनुमान व्यक्त करता है। उन्होंने दूसरे पहलुओं पर जवाब देने से इनकार कर दिया। देश के कुछ राज्यों में किसानों ने आत्महत्याएं की हैं। इस वर्ष बेमौसम बारिश के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल नुकसान मुआवजे में भुगतान के नियमों में ढील दी थी।

उन्होंने कहा कि पिछली बार कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न मंत्रियों व विभागों से कहा था कि इस तरह की आपदा से निपटने के लिए तैयार रहें।

अनुमान के मुताबिक प्रभावित इलाके में उत्तर-पश्चिम भारत शामिल होगा जिसमें दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान आते हैं और यहां करीब 85 फीसदी बारिश होगी। क्षेत्र में पिछले वर्ष भी कम बारिश हुई थी। मध्य भारत में 90 फीसद, दक्षिण प्रायद्वीप में 92 फीसद और पूर्वोत्तर में 90 फीसद बारिश होने के अनुमान हैं जिसमें आठ फीसद कम या अधिक अशुद्धता हो सकती है।

कम बारिश का अनुमान अल-नीनो के कारण हो सकता है जिससे देश के कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है।

कृषि क्षेत्र में देश की करीब 60 फीसद आबादी को रोजगार मिलता है जो मॉनसून पर काफी निर्भर है क्योंकि केवल 40 फीसद कृषि योग्य भूमि सिंचाई के तहत आती है। पिछले साल देश में 12 फीसद कम बारिश हुई थी जिससे अन्न, कपास और तिलहन का उत्पादन प्रभावित हुआ था। खराब मॉनसून के कारण वित्त वर्ष 2014-15 में कृषि का विकास 0.2 फीसद रहा।

पिछले वर्ष अप्रैल में मौसम विभाग ने शुरू में 95 फीसद बारिश का अनुमान जताया था जिसे जून में संशोधित कर 93 फीसद किया गया था। बहरहाल मौसम के अंत में भारत में केवल 88 फीसद बारिश हुई थी। सरकार के अनुमान के मुताबिक वर्ष 2014-15 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) में खाद्यान्नों का उत्पादन घटकर 251.12 मिलियन टन रहा था जबकि उसके पिछले वर्ष में रिकॉर्ड 265.04 मिलियन टन उत्पादन हुआ था।

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