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बैंक में भी सुरक्षित नहीं पैसा! SBI के खाते से निकले AIIMS के 12 करोड़ रुपए, जानें क्या है मामला

एम्स ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है, ‘‘प्रथम दृष्टया ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह बताता हो कि एम्स अधिकारियों की प्रत्यक्ष भूमिका या मिलीभगत है क्योंकि हस्ताक्षर करने वाले अधिकृत लोगों के दस्तखत भी फर्जी नजर आते हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: November 30, 2019 9:52 PM
देश का शीर्ष अस्पताल एम्स भी बैंकिंग फ्रॉड का शिकार हो गया है।(फाइल फोटो)

देश में पैसा बैंकों में भी सुरक्षित नहीं है इसका ताजा उदाहरण यह है कि देश का शीर्ष चिकित्सा संस्थान एम्स भी बैंंकिंग धोखाधड़ी का शिकार हो गया है। जालसाजों ने ‘क्लोन किये गये चेक’ का कथित तौर पर इस्तेमाल करते हुए एसबीआई में मौजूद इसके दो बैंक खातों से पिछले एक महीने में 12 करोड़ रुपये से अधिक राशि उड़ा ली। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने पीटीआई भाषा को बताया कि यह राशि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में मौजूद खातों से अन्य शहरों में स्थित बैंक की शाखाओं से निकाली गई। यहां तक कि इस धोखाधड़ी के प्रकाश में आने बाद भी दोषियों ने पिछले एक हफ्ते में एसबीआई के देहरादून और मुंबई स्थित अन्य शाखाओं से 29 करोड़ रुपये से अधिक राशित उड़ाने की कोशिशें की। इसके लिये उन्होंने कथित तौर पर ‘क्लोन किये हुए चेक’ का इस्तेमाल किया।

सूत्रों ने बताया कि जालसाजों ने देहरादून में एसबीआई की एक शाखा से 20 करोड़ रुपये जबकि मुंबई स्थित बैंक की शाखा से नौ करोड़ रुपये उड़ाने की कोशिश की। हालांकि, ये कोशिशें नाकाम कर दी गईं। अस्पताल प्रशासन ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से संपर्क कर घोटाले की जांच की मांग की है।

एक अधिकारी के मुताबिक एम्स ने स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा है कि एसबीआई की शाखाओं में जालसाजों द्वारा पेश किये गये जाली चेक ‘अल्ट्रा वॉयलेट रे’ (पराबैंगनी किरण) जांच को पार कर गये और उसी क्रम संख्या के मूल चेक अब भी एम्स के पास पड़े हुए हैं।एक बैंक अधिकारी ने बताया कि 25,000 रुपये या इससे अधिक रकम के चेक की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से जांच की जाती है।

एम्स ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है, ‘‘प्रथम दृष्टया ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह बताता हो कि एम्स अधिकारियों की प्रत्यक्ष भूमिका या मिलीभगत है क्योंकि हस्ताक्षर करने वाले अधिकृत लोगों के दस्तखत भी फर्जी नजर आते हैं।’’ रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘भुगतान करने या रोकने को सीधे तौर पर एसबीआई बैंक और इसकी शाखाओं में नियंत्रण तंत्र की नाकामी बताई जा सकती है। इसलिये यह नुकसान एम्स से जुड़ा नहीं है।’’ यह भी बताया गया है कि एसबीआई अन्य शाखाओं में सत्यापन प्रोटोकॉल पालन करने में नाकाम रही। साथ ही, बैंक से चोरी हुई यह राशि जमा करने को कहा गया है।

सूत्रों ने बताया कि एसबीआई में एम्स के मुख्य खाते से फर्जी तरीके से सात करोड़ रुपये उड़ा लिये गये। यह खाता एम्स के निदेशक द्वारा संचालित किया जाता है। वहीं पांच करोड़ रुपये डीन, रिसर्च ऑफ एम्स के पास मौजूद खाते से उड़ाये गये। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद एसीबीआई ने अपनी सभी शाखाओं को सतर्क कर दिया है और अपने कर्मचारियों को एम्स, नयी दिल्ली द्वारा जारी मोटी राशि के चेक का भुगतान नहीं करने की सलाह दी है।एसबीआई कर्मचारी के आंतरिक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किये गये एक संदेश में कहा गया है, ‘‘देश भर में भारी संख्या में क्लोन चेकों का भुगतान किये गये हैं–एजीएम, धोखाधड़ी निगरानी प्रकोष्ठ ।’’

वहीं, एसबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि बैंक के निर्देशों के मुताबिक यदि दो लाख रुपये से अधिक का चेक बैंक की किसी अन्य शाखा में भुनाने की कोशिश की जाती है तो उसे ‘क्लियर’ करने या यहां तक कि रुपये हस्तांतरित करने से पहले पुष्टि पाने के लिये ग्राहक से संपर्क करना होता है।

साथ ही, अन्य शाखाओं को मोटी रकम के चेक के मामले में खाता धारक का ब्यौरे की पुष्टि के लिये मूल शाखा (जिसमें ग्राहक का खाता है) से संपर्क करने की जरूरत होती है। जब चेक क्लियंिरग के लिये प्राप्त होते हैं तो बैंक खाता धारक के मोबाइल पर संदेश भी भेजता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देशों के मुताबिक यदि तीन करोड़ रुपये से अधिक की बैंक धोखाधड़ी होती है तो बैंक सीबीआई के पास शिकायत दर्ज कराते हैं।फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एसबीआई ने मौजूदा मामले में सीबीआई से संपर्क किया है नहीं।
(भाषा इनपुट्स के साथ)

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