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आप से गठबंधन की सोच सकती है कांग्रेस: एयर स्ट्राइक से भारी पड़ी बीजेपी, बनाना होगा पूरा नया प्लान

पुलवामा हमले से पहले राफेल, कर्जमाफी, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्तारूढ़ भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने वाली कांग्रेस अब बैकफुट पर नज़र आ रही है। विपक्षी दलों से गठबंधन के बारे में एक बार फिर सोच सकती है कांग्रेस।

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने यह बयान मेव समुदाय को संबोधित करते हुए दिया। फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस

पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले और भारतीय वायु सेना द्वारा पाकिस्तान में हमले के बाद बीजेपी के पक्ष में जो माहौल बनता दिख रहा है, उस स्थिति में कांग्रेस अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर हो गई है। 26 फरवरी से पहले कांग्रेस राफेल, कर्जमाफी, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्तारूढ़ भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेर रही थी और फ्रंटफुट पर बैटिंग कर रही थी, वो अचानक बैकफुट पर नजर आने लगी है।

कुछ ऐसे संकेत भी हैं कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में ढाई दशक बाद हुए समाजवादी पार्टी और बसपा के गठबंधन से एक बार फिर बात कर सकती है। वहीं दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन न करने के अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया “पूरी दशा बदल जाती है। हमें फिर से अपने कैंपेन और अन्य रणनीति दोनों की योजना के बारे में सोचना होगा। हमें हर चीज को फिर से जांचना होगा।” पुलवामा हमले से एक दिन पहले 13 फरवरी को राहुल गांधी ने कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में कहा था “हम भाजपा को डेली न्यूज़ साइकिल में हरा रहे हैं और कांग्रेस अब फिर से मजबूत होती दिखाई दे रही है।” कांग्रेस का मानना ​​था कि राफेल फाइटर जेट डील, नौकरी संकट और किसान संकट जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने मोदी के खिलाफ महत्वपूर्ण गति पकड़ी थी।

लेकिन, कांग्रेस स्वीकार करती है कि पुलवामा हमले के बाद चीज़ें पहले जैसी नहीं रही। पार्टी के लिए अब चुनौती यह है कि उन्हें एक बार फिर वास्तिविक मुद्दों को सामने लाना होगा। गवर्नेंस की बात करनी होगी इन मुद्दों से कांग्रेस भाजपा की सरकार को घेर सकती है। विपक्ष एक साथ नहीं दिखाई दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और एनसीपी 27 फरवरी को हुई एक बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार और पीएम पर हमला करने के इच्छुक विपक्षी दलों के साथ नहीं थे। ममता बनर्जी और एन चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं ने तर्क दिया था कि विपक्ष रक्षात्मक नहीं होना चाहिए, लेकिन कांग्रेस को लगा कि अभी मोदी पर हमला करने का सही समय नहीं है।

कुछ दिनों पहले कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में 20 से ज्यादा विपक्षी नेताओं को एक मंच पर लाकर मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा चुनाव के मैदान में ताल ठोंकने वाली पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का रुख भी बदल सकता है। कहा जा रहा है कि नई परिस्थिति में तृणमूल अब कांग्रेस के साथ अपने मतभेदों को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है। सूत्रों का कहना है कि दोनों पार्टियों की पश्चिम बंगाल की 42 संसदीय सीटों पर आपसी सहमति बन सकती है। लेकिन पेंच सीपीएम को लेकर फंस गया है। तृणमूल और सीपीएम एक दूसरे की कट्टर विरोधी हैं, सीपीएम ने भी कांग्रेस के साथ बंगाल की 6 सीटों पर समझौते की बात कही है।

 

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