अमेरिका-इजरायल के ईरान से युद्ध को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कुछ लोगों के स्वार्थ का नतीजा बताया है। उन्होंने नागपुर में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि दुनिया को लड़ाई नहीं मेल-मिलाप और शांति की जरूरत है।
किसी भी देश का जिक्र किए बिना मोहन भागवत ने कहा कि विश्व अभी लड़खड़ा रहा है, स्वार्थ की वजह से युद्ध हो रहा है। मोहन भागवत ने कहा कि सबको ऐसा लग रहा है कि दुनिया आज विनाश के कगार पर जा रही है। अपने पूर्वजों की वजह से सिर्फ भारत के पास सबको जोड़ने वाला तत्व है।
‘…बाकी दुनिया जंगल का कानून मानकर चलती है’
उन्होंने कहा कि भारत मानवता का नियम अपनाता है जबकि अन्य कुछ देश ‘जो सबसे ताकतवर है, वही टिकेगा’ वाली सोच में विश्वास करते हैं। मोहन भागवत ने कहा कि लड़खड़ाती हुई दुनिया को फिर से धर्म का आधार देकर संतुलन संभालना यह हमारा काम है। यह हमें ईश्वर द्वारा दिया गया कर्तव्य है, जब हम यह भूल जाते हैं तो हमारी भौतिक अवनति होती है।
पश्चिम एशिया में स्थिति को पूरी दुनिया के लिए चुनौतीपूर्ण: विदेश मंत्रालय
पश्चिम एशिया के वर्तमान हालातों पर गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह स्थिति न सिर्फ भारत, बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय के लिए एक ”परीक्षा की घड़ी” है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ”हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारे नेता अपने समकक्षों के संपर्क में हैं, जैसा कि मैंने अभी हमारे प्रधानमंत्री और कुवैत के युवराज के बीच हुई बातचीत का जिक्र किया। इसी तरह, हम कई अन्य नेताओं के भी संपर्क में हैं।”
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कतर, फ्रांस, जॉर्डन, ओमान और मलेशिया के शीर्ष नेताओं से बात की और उनके साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए क्षेत्र में संघर्ष को कम करने की जरूरत बताई। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
