राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को वैज्ञानिकों के हवाले से कहा कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक में बोलते हुए वैज्ञानिकों के हवाले से कहा कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है। यह बात हमारे परिवारों में नव दंपतियों को बताई जानी चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा कि विवाह का उद्देश्य सृष्टि आगे चले, यह होना चाहिए, वासना पूर्ति नहीं। इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित और सशक्त होने की आवश्यकता है। हमको किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना है।

हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने लालच और जबरदस्ती हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा।

बढ़ती घुसपैठ पर भी जताई चिंता

बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है। उन्होंने कहा कि सद्भाव ना रहने से भेदभाव होता है। हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं। मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं। एक समय भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे दूर करना होगा।

उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा सद्भाव की विचारधारा है। घर-परिवार का आधार मातृशक्ति है। हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह माताएं तय करती थी। यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक प्रश्न के उत्तर में संघ प्रमुख ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए, यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए।

‘भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा’

मोहन भागवत ने कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा। विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है। उन्होंने समाज की सज्जन शक्ति का आवाहन करते हुए कहा कि बस्ती स्तर पर सामाजिक सद्भाव से जुड़ी बैठकें नियमित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं। इससे हमें सावधान रहना होगा। एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा।

‘कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन’ कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा है कि मंदिर कुआं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए और उनमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को बताना होगा कि करिअर क्या है, पेट भरना, ज्यादा कमाना, उपभोग करना करिअर नहीं है। करिअर कमाने से ज्यादा बांटने में है। बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जो अमीर होकर दान दें, दूसरों के लिए जीना सीखें।

‘संघ के कुटुम्ब में जात-पात नहीं’

सरसंघचालक ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर प्रयास होने चाहिए। संघ सारे हिंदू समाज को एक मानता है। इसलिए हमें व्यक्तिगत स्तर पर और पारिवारिक स्तर पर आपसी मेलजोल बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता भाषण से नहीं, करने से आएगी। संघ के कुटुम्ब में जात-पात नहीं है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज की इकाई व्यक्ति नहीं परिवार है। सामाजिक व्यवहार का परीक्षण परिवार में होता है। सरसंघचालक ने कहा कि 100 से 70 की संख्या में कुटुम्ब मिलन बस्ती और शाखा स्तर पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम तकनीक को नहीं रोक सकते लेकिन इसका उपयोग अनुशासन में रहकर हो।

यह भी पढ़िए: इस्लाम को लेकर ये क्या बोल गए मोहन भागवत?

कुछ दिनों पहले मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि इस्लाम को शांति का धर्म कहा जाता है, लेकिन शांति दिखाई नहीं देती। अगर धर्म में आध्यात्मिकता न हो, तो वह प्रभुत्वशाली और आक्रामक हो जाता है। पूरा बयान जानने के लिए यहां क्लिक करें।