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मोगा: बस से फेंकी गई लड़की के पिता ने कहा- ‘सुखबीर पर मामला दर्ज होने के बाद ही अंतिम संस्कार’

पंजाब के शिक्षा मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा ने मोगा कांड पर असंवेदनशील बयान देकर बादल सरकार की मुश्किल बढ़ा दी। छेड़खानी के बाद फेंकी गई लड़की की मौत को रखड़ा ने रब दी इच्छा बताई है। गुरुवार को बादल परिवार की परिवहन कंपनी की एक बस में हादसा हुआ, जिसमें एक मां-बेटी के साथ छेड़छाड़ के बाद दोनों को चलती बस से नीचे धकेल दिया गया, जिसमें बेटी की मौत हो गई और मां घायल हो गई।

Author May 3, 2015 8:12 AM
सुखबीर ने अपनी बसें सड़क से हटाने के आदेश दिए, पिता ने कहा- ‘सुखबीर पर मामला दर्ज होने के बाद ही अंतिम संस्कार’ (फोटो: गुरमीत सिंह)

पंजाब के शिक्षा मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा ने मोगा कांड पर असंवेदनशील बयान देकर बादल सरकार की मुश्किल बढ़ा दी। छेड़खानी के बाद फेंकी गई लड़की की मौत को रखड़ा ने रब दी इच्छा बताई है। गुरुवार को बादल परिवार की परिवहन कंपनी की एक बस में हादसा हुआ, जिसमें एक मां-बेटी के साथ छेड़छाड़ के बाद दोनों को चलती बस से नीचे धकेल दिया गया, जिसमें बेटी की मौत हो गई और मां घायल हो गई।

रखड़ा ने कहा-दुर्घटनाओं को कोई रोक नहीं सकता। जो कुछ हुआ वह ईश्वर की मर्जी थी। हमारे साथ कभी भी दुर्घटना हो सकती है। जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। आप कुदरत की मर्जी के खिलाफ नहीं जा सकते।

इस बीच, उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार शाम आर्बिट एविएशन, जिसमें उनका भी सह-स्वामित्व है, की सभी बसों को सड़क से हटाने के आदेश दिए। उधर पीड़िता के पिता ने जान को खतरा बताते हुए अपने परिवार के लिए सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने दावा किया कि उन पर समझौता करने का राजनीतिक दबाव है। पीड़िता के पिता सुखदेव सिंह ने कहा, ‘हम तब तक अपनी बेटी के शव का अंतिम संस्कार नहीं करने जा रहे जब तक बस मालिक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू कर इंसाफ नहीं होगा’।

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उन्होंने अधिकारियों से यह लिखित आश्वासन भी मांगा कि उनके परिवार को कोई नुकसान नहीं होगा। वे अपनी बेटी के अंतिम संस्कार से पहले उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल के खिलाफ केस दर्ज करने और आर्बिट एविएशन के रोड परमिट को रद्द करने की मांग पर भी कायम रहे। आर्बिट एविएशन की बस से ही पीड़िता और उसकी मां को छेड़खानी के बाद फेंक दिया गया था।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित विपक्षी पार्टियों के बढ़ते विरोध के बीच सुखबीर बादल ने अपनी कंपनी की बसों को सड़क से हटाने के आदेश देते हुए यह भी कहा कि बस के संचालक कर्मियों को ‘ओरिएंटेशन कोर्स’ के लिए भेजा जाए।

इस बीच मोगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जतिंदर सिंह खेहरा ने कहा कि लड़की के अंतिम संस्कार पर कोई रास्ता नहीं निकल पाया है। लड़की का शव यहां सिंघावाला गांव में एक शव गृह में रखा गया है। राज्य सरकार की लड़की के परिवार को उसके अंतिम संस्कार के लिए राजी करने की सारी कोशिशें बेकार रहीं। उन्होंने 20 लाख रुपए के मुआवजे, लड़की की मां के लिए सरकारी नौकरी, उसका मुफ्त इलाज और मामले की सुनवाई त्वरित अदालत में कराने जैसी तमाम पेशकश ठुकरा दी।

बाद में प्रतिक्रिया में रखड़ा ने अपने विवादित बयान से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मैंने गेहूं और प्रदेश में लड़कियों के कालेजों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। मोगा से जुड़ी घटना पर कुछ भी नहीं कहा। पंजाब में गेहूं के कम उत्पादन पर उन्होंने कहा था कि प्रकृति के खिलाफ कोई कुछ नहीं करता। यब सब रब की इच्छा पर निर्भर करता है।

उन्होंने प्रदेश में नए सरकारी कालेज और दुर्घटनाओं में विद्यार्थियों की मौत पर ही कुछ बोला था। उन्होंने कहा, सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकारी प्रयास के अलावा लोगों को ध्यान रखना चाहिए। बावजूद इसके सड़क दुर्घटनाओं को रोकना मुश्किल है।

रखड़ा ने कहा, उन्हें तो मोगा मामले की पूरी जानकारी भी नहीं है। ऐसे में उनके उस संदर्भ में बयान देने का सवाल ही नहीं उठता। बयान के बाद आलोचना से घिरे मंत्री ने कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया गया है।

उधर, मोगा के शिअद विधायक जोगिंदरपाल जैन सुखबीर बादल के समर्थन में आ जुटे। उन्होंने कहा कि आरबिट की बस के उस हादसे में उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल का कोई दोष नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोगा मामले के बाद आम आदमी पार्टी और अन्य दल राजनीति कर रहे हैं। उन्हें पीड़ित परिवार से कोई सरोकार नहीं बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए हंगामा खड़ा कर रहे हैं।

जैन बोले, उनकी दस बसें हैं। वे हर समय साथ तो नहीं रह सकते। अगर उनका कोई स्टाफकर्मी किसी के साथ कुछ अप्रिय करे तो उसमें मालिक क्या कर सकता है। मोगा मामले में आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। कहा, ऐसा कोई कानून नहीं जिसके तहत सुखबीर बादल को जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।

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उन्होंने आरोप लगाया कि आप और कांग्रेस के हस्तक्षेप की वजह से मृतक बच्ची का अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा। शुक्रवार को पीड़ित पक्ष के साथ समझौता भी उसी वजह से नहीं हो सका। ऐसे नेता पीड़ित परिवार की मदद नहीं बल्कि तमाशा करने में लगे हैं। उन्होंने कहा, आप के प्रदर्शन में हिस्सा लेने वालों को सौ-दो सौ रुपए देकर लाया गया। उन्होंने यह सब देखा इसलिए स्पष्ट तौर पर बोल रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल के विधायक जोगिंदर सिंह जैन ने विपक्षी दलों पर आग में घी डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा-सरकार ने अब तक तमाम मुमकिन कदम उठाए हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस सहित विपक्षी दल आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। वे परिवार को बरगला रहे हैं और लड़की की गरिमा का अपमान कर रहे हैं। जहां तक मुआवजे की बात है, ‘यह अनुदान के रूप में दिया गया है, घूस के तौर पर नहीं। विपक्ष घटनाक्रम को देख रहा है और कर कुछ नहीं रहा है। लड़की का परिवार हमसे मुआवजा लेने तक को तैयार नहीं हैं। हालांकि पहले उन्होंने ही धन और नौकरी की मांग की थी। हमने उनके 16 वर्ष के लड़के को नौकरी देने के लिए सरकार से खास अनुमति ली है।

इस बीच राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने अस्पताल में पीड़िता की मां से मिलकर उनकी सेहत के बारे में पूछा। पुनिया ने कहा कि कंपनी के मालिकों पर मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

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