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Modi2.0 Hundred Days: मोदी सरकार-2 के 100 दिन और 5 बड़े विवादास्पद फैसले

एक तरफ जहां UAPA के चलते जहां प्रशासनिक शक्तियों की ताकत बढ़ने से नागरिकों के लोकतांत्रिक आजादी पर ग्रहण लगने की आशंका जाहिर की गई, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर को मिले विशेषाधिकार अनुच्छेद 370 और 35A को खत्म करके सरकार ने ऐतिहासिक उलट-फेर कर दिया।

Author Updated: September 8, 2019 7:14 PM
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने आर्टिकल 370 हटाने से लेकर ट्रिपल तलाक पर कानून बनाने जैसे बड़े फैसले लिए। (फोटो क्रेडिट/PTI)

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल (Modi 2.0) के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। इन 100 दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिनसे देश का भूगोल, सामाजिक परिस्थितियां एवं आर्थिक परिस्थितियां और आंतरिक सुरक्षा के मद्देनज़र एजेंसियों की शक्तियों में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिला है। एक तरफ जहां UAPA के चलते जहां प्रशासनिक शक्तियों की ताकत बढ़ने से नागरिकों के लोकतांत्रिक आजादी पर ग्रहण लगने की आशंका जाहिर की गई, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर को मिले विशेषाधिकार अनुच्छेद 370 और 35 A को खत्म करके सरकार ने ऐतिहासिक उलट-फेर कर दिया। हम आपको मोदी 2.0 के 100 दिन के शुरुआती कार्यकाल में लिए गए उन पांच बड़े फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको लेकर काफी विवाद हुए हैं।

मुस्लिम महिलाओं को 3 तलाक से मुक्ति: दूसरी बार सत्ता में आते ही नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्त कराने वाला कदम उठाया। सरकार ने तीन तलाक पर प्रतिबंध के लिए ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019’ को लोकसभा एवं राज्यसभा से पारित कराया। अगस्त महीने में कानून बनने के बाद भारत में तीन तलाक कानूनी तौर पर अपराध बन गया। गौरतलब है कि जब इस कानून के लिए विधेयक पास हो रहा था, तब राज्यसभा में केंद्र सरकार के पास पर्याप्त बहुमत भी नहीं था, बावजूद इसके सरकार इसे पारित कराने में कामयाब रही। हालांकि, तीन तलाक विधेयक को लेकर काफी हो-हल्ला भी रहा। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने विधेयक को लेकर कई खामियां और आशंकाएं जाहिर कीं। जिनमें तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में रखना प्रमुख था।

अनुच्छेद 370 और 35 को हटाना: सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर के मामले में अब तक सबसे बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया। जनसंघ के जमाने से अनुच्छेद 370 को हटाने का मुद्दा प्रभावी रहा है। लेकिन, 2019 में जाकर मोदी सरकार ने इसे आखिरकार निष्प्रभावी कर दिया। साथ ही साथ दो केंद्रशासित राज्यों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बांट दिया। केंद्र सरकार के इस कदम के बाद जहां जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन शुरू हो गया, वहीं विपक्ष के कुछ राजनीतिक दलों ने इसकी मुखालफत शुरू कर दी। विपक्ष का कहना है कि सरकार के द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने का तरीका गलत रहा है। वहीं, एक महीने से ऊपर हो गया है और घाटी के अधिकांश हिस्सों में नागरिकों पर कई तरह के प्रतिबंध लागू हैं।

UAPA एक्ट में संशोधन: नरेंद्र मोदी सरकार के UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम (संशोधन) विधेयक-2019 को लेकर भी विपक्ष के साथ काफी विवाद रहा। हालांकि, इसे भी पारित कराने में सरकार कामयाब रही। नया UAPA कानून आतंकी वारदातों में शामिल या उससे प्रेरित किसी भी शख्स को आतंकी घोषित करने का अधिकार रखता है। गौरतलब है कि अभी हाल ही में मोदी सरकार ने इसी कानून के तहत हाफिज सईद, दाऊद इब्राहिम, जकीउर रहमान लखवी और मसूद अजहर को आतंकी घोषित किया है। यह कानून NIA को आरोपी की संपत्ति तक जब्त करने का अधिकार देता है।

मोटर व्हीकल एक्ट 2019: ट्रैफिक व्यवस्था को दुरूस्त रखने और नागरिकों को इसके प्रति गंभीर बनाने के मकसद से मोटर व्हीकल एक्ट-2019 को लागू किया गया। लेकिन, इस कानून में जुर्माने की राशि इतनी तय की गई, जिसे लेकर देश भर में हड़कंप जैसी स्थिति है। चालान की राशि के चलते कई जगहों पर लोगों ने अपना वाहन ही पुलिस के पास छोड़ना मुनासिब समझा। पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश ने तो इसे अभी तक लागू नहीं किया है। इस कानून के चलते अब यातयात नियमों का उल्लंघन करने वालों बिल्कुल भी नहीं बख्शा जाएगा। वैसे जहां एक तरफ इस बढ़े हुए जुर्माने को लेकर विवाद है, तो वहीं सड़कों पर नियम का असर भी देखा जा रहा है। लोग ट्रैफिक व्यवस्था का पालन करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

बैंकों का विलय: नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने आर्थिक सुधार की दिशा में बैंकों का विलय करके चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में विलय कर दिया गया। वहीं, सिंडिकेट बैंक को केनरा बैंक और इलाहाबाद बैंक को इंडियन बैंक में मिलाया गया। आंध्र बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में मिलाया गया। सरकार का दावा है कि इस कदम से बढ़ते हुए NPA से राहत मिलेगी। जबकि, सरकार के इस कदम की आलोचना करने वालों का कहना है कि इससे स्थिति में सुधार नहीं होने वाला है।

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