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नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा ने किया साथ चलने का वादा

अनिता कत्याल/एजंसियां वाशिंगटन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पहली शिखर स्तरीय बैठक में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाने, असैन्य परमाणु करार को लागू करने में आ रही बाधाओं को दूर करने और आतंकवाद से लड़ने में परस्पर सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता जताई। इससे पहले अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन […]

गणतंत्र दिवस पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद होना कई मामलों में खास है।

अनिता कत्याल/एजंसियां

वाशिंगटन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पहली शिखर स्तरीय बैठक में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाने, असैन्य परमाणु करार को लागू करने में आ रही बाधाओं को दूर करने और आतंकवाद से लड़ने में परस्पर सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता जताई। इससे पहले अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के लिए लिखे साझा संपादकीय में दोनों नेताओं ने कहा कि यह रिश्तों का एक ‘नया एजंडा’ तय करने का वक्त है। दोनों देश आकांक्षा के मजबूत स्तर और व्यापक विश्वास के जरिए साधारण और पारंपरिक लक्ष्यों से आगे निकल सकते हैं। प्रधानमंत्री ने बराक ओबामा को भारत आने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच मंगलवार को हुई लंबी चली बातचीत में आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश सहित व्यापक मुद्दों पर चर्चा हुई। मोदी ने अमेरिका में भारतीय सेवा क्षेत्र की पहुंच को सुगम बनाने की मांग की। दोनों देशों के बीच अपने रक्षा सहयोग को 10 साल और बढ़ाने पर सहमति बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी कंपनियों को भारतीय रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भागीदारी करने का निमंत्रण दिया।
दोनों के बीच पहले सीमित स्तरीय और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ताएं हुई। इनमें दक्षिण और पश्चिम एशिया में आतंकवाद के उभरते नए खतरे सहित एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता जैसे विषयों को लिया गया।

बैठक के बाद मोदी ने कहा,‘हम दोनों असैन्य परमाणु सहयोग करार को आगे ले जाने पर सहमत हुए हैं। हम इससे जुड़े मुद्दों का शीघ्र समाधान निकालने के प्रति गंभीर हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों के लिए यह बहुत जरूरी है।’

मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार और अमेरिका में बुश प्रशासन के दौरान भारत अमेरिका असैन्य परमाणु करार हुआ था। लेकिन जवाबदेही कानूनों से जुड़े मुद्दों पर यह आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

मोदी ने ओबामा से आग्रह किया कि वे ऐसे कदम उठाएं जिससे भारतीय कंपनियां सेवा क्षेत्र में अमेरिका के बाजार में आसानी से पहुंच बना सकें। रक्षा क्षेत्र के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने सुरक्षा और रक्षा संबंधी वार्ता को और आगे बढ़ाने का निर्णय किया है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा कंपनियों से भारतीय रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सहयोग करने की अपील की।

भारत ने हाल ही में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की सीमा को 26 से बढ़ाकर 49 फीसद कर दिया है।

दक्षिण और पश्चिम एशिया में उभरती आतंकवाद की चुनौतियों पर चिंता जताते हुए मोदी ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद निरोधक तंत्र और खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान में सहयोग और बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

पश्चिम एशिया में इन दिनों आइएसआइएस नामक आतंकी संगठन ने बड़े भूभाग पर कब्जा जमा लिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बराक ओबामा को भारत आने का निमंत्रण दिया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। संयुक्त बयान के बाद मोदी ने वाइट हाउस के ओवल कार्यालय मेंक हा,‘ मैंने ओबामा और उनके परिवार को सुविधाजनक समय पर भारत आने का न्योता दिया है।’ इसके बारे में आपसी सुविधाजनक समय पर दोनों पक्ष इस यात्रा की रूपरेखा तय करेंगे।

दोनों नेताओं की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में ओबामा ने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है। मोदी ने कहा,‘भारत और अमेरिका स्वाभाविक वैश्विक साझेदार हैं, जो साझा मूल्यों और हितों पर आधारित है।’ ओबामा ने कहा कि दोनों नेताओं ने व्यापार और आर्थिक सहयोग, अंतरिक्ष और वैज्ञानिक विकास के क्षेत्र में अनुसंधान विशेष तौर पर इबोला जैसी चुनौतियों से निपटने के विषय पर सहयोग बढाने के बारे में चर्चा की।

बातचीत के बाद दोनों नेता सीधे मार्टिन लूथर किंग जूनियर के स्मारक पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन के नेता को संयुक्त रूप से श्रद्धांजलि दी। ओबामा आखिरी समय में मार्टिन लूथर किंग जूनियर को श्रद्धांजलि देने मोदी के साथ शामिल हुए। दोनों नेताओं ने स्मारक का भ्रमण किया और ओबामा को उस स्थान के महत्त्व के बारे में मोदी को बताते हुए देखा गया। पहले नरेंद्र मोदी को अकेले स्मारक जाना था लेकिन अंतिम समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी उनके साथ जाने का निर्णय लिया।

इससे पहले दोनों नेताओं ने अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की वेबसाइट एजिसन के लिए एक साझा संपादकीय लिखा। इसमें दोनों नेताओं ने कहा कि यह रिश्तों का एक ‘नया एजंडा’ तय करने का वक्त है और दोनों देश आकांक्षा के मजबूत स्तर और व्यापक विश्वास के जरिए साधारण और पारंपरिक लक्ष्यों से आगे निकल सकते हैं। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में प्रकाशित संपादकीय में मोदी और ओबामा ने कहा, ‘यह एक ऐसा एजंडा होगा, जो भारत के महत्त्वाकांक्षी विकास के एजंडा को पूरा करने वाले व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में हमारे सहयोग को विस्तृत बनाएगा। इसके लिए परस्पर लाभकारी उपायों को तलाशने में मददगार होगा। इसके साथ ही अमेरिका प्रगति के वैश्विक इंजन के रूप में बरकरार रहेगा।

मोदी और ओबामा ने कहा कि वैश्विक साझीदार के तौर पर वे खुफिया जानकारियों को साझा करके, आतंकवाद विरोधी लड़ाई और कानून-प्रवर्तन संबंधी सहयोग के जरिए अपनी गृह सुरक्षा बढ़ाने के लिएप्रतिबद्ध हैं। साथ ही दोनों देश समुद्री क्षेत्र में नौवहन और वैध व्यापार की स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए मिलकर काम करेंगे।

दोनों नेताओं ने कहा, आज हमारी साझीदारी मजबूत, विश्वसनीय और स्थायी है और यह विस्तार भी ले रही है। हमारे संबंध में न सिर्फ संघीय स्तर पर बल्कि राज्य और स्थानीय स्तर पर भी, दोनों सेनाओं के बीच, निजी क्षेत्रों और सिविल सोसायटी के बीच पहले के मुकाबले अधिक द्विपक्षीय सहयोग शामिल है।

उन्होंने कहा, साल 2000 में ऐसा बहुत कुछ हुआ जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी यह घोषित कर सके कि हम स्वाभाविक सहयोगी हैं। मोदी और ओबामा ने कहा कि दोनों देशों के बीच के संबंध की वास्तविक संभावना को अब भी पूरी तरह से हकीकत की शक्ल देना बाकी है, हालांकि यह साझीदारी मजबूत, विश्वसनीय और स्थायी है।

उन्होंने कहा, अभी हमारे संबंध की वास्तविक संभावना को अभी पूरी तरह से हकीकत का रूप दिया जाना बाकी है। भारत में नई सरकार का आना हमारे संबंध को विस्तृत और प्रगाढ़ बनाने का एक स्वाभाविक अवसर है। मोदी और ओबामा ने कहा, ‘आकांक्षा के मजबूत स्तर और व्यापक विश्वास के साथ हम साधारण और पारंपरिक लक्ष्यों से आगे निकल सकते हैं। यह उस नए एजंडे को तय करने का समय है जो हमारे नागरिकों के लिए यथार्थपूर्ण लाभ सुनिश्चित करता है।

दोनों देशों के बीच मौजूदा सहयोग का उल्लेख करते हुए दोनों नेताओं ने कहा, हमारी सेनाएं हवा, भूमि और समुद्र में साझा अभ्यास करती हैं और हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रमों का संपर्क भी पृथ्वी से मंगल तक सहयोग के असाधारण क्षेत्रों तक है। उन्होंने ‘सदा आगे बढ़ते रहने वाले’ भारतीय अमेरिकी समुदाय द्वारा निभाई जा रही भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच जीवंत सेतु है।

 

 

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