कोरोनाः मोदी के मंत्री का दावा- ऑक्सीजन से कोई मौत नहीं; अपनों को खोने वालों ने सुनाईं दिल दहलाने वाली कहानियां

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऐसी ढेरों कहानियां थीं जिन्हें सुनने का बाद वह वीभत्स माहौल आंखों के सामने नाचने लगता है। हालांकि सरकार का कहना है कि उस दौरान किसी की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई थी।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान की तस्वीर। क्रेडिट- एक्सप्रेस, अमित मेहरा

कोरोना की दूसरी लहर के समय भारत में ऑक्सिजन की कमी एक बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आई। इस त्रासदी में न केवल मरीजों बल्कि अस्पतालों और डॉक्टरों को भी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसे कठिन समय में देशभर से दुखद समाचार मिल रहे थे। दूसरी लहर के बारे में अब कि जब विश्लेषण किया जा रहा है, तब केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री द्वारा ना तो किसी मरीज की ऑक्सीजन की कमी के कारण मृत्यु का उल्लेख किया गया और ना ही ब्यौरा दिया गया।

पूरे भारत में लोग इस रिपोर्ट को झूठा बताते हुए गुस्से में हैं और उन्होंने इस रिपोर्ट की आलोचना करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। ऑक्सीजन की भारी कमी को याद करते हुए, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एसओएस संदेश, और ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए एक-दूसरे के लिए दौड़ते हुए, विभिन्न राज्यों के लोगों ने रिपोर्ट को Falsified बताया। कई लोग यह बताने के लिए आगे आए हैं कि कोविड -19 की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण उनके परिचितों की मृत्यु हो गई

जानिए कुछ लोगों की कहानियां

24 अप्रैल 2021
जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल, दिल्ली

शेर चंद, अब अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद एक अकेला पिता है। उन्होंने कहा कि जिस दिन पत्नी की मौत हुई, उसी रात करीब आठ बजे वह उनसे मिले थे। यहां तक कि मौत से 2 घंटे पहले वह भी वो अपनी पत्नी से मिले थे। वह कुछ खाने के लिए कैंटीन गए थे तभी अफरा-तफरी मच गई। लोग कह रहे थे कि अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो गई है।

शेर चंद एमसीडी में दिहाड़ी मजदूर हैं, उन्होंने गांव में अपनी जमीन बेच दी और घर खरीदने के लिए रिश्तेदारों से पैसे उधार लिए लेकिन अपना सारा पैसा अपनी पत्नी के इलाज पर खर्च कर दिया। वह अपनी पत्नी को भी नहीं बचा सके।

2- स्वर्गीय चंद्रमोहन जी की पत्नी जसविंदर जी का कहना है कि 23 अप्रैल को जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल में उनके पति की मौत स्वाभाविक मौत नहीं थी। अस्पताल की गैरजिम्मेदारी के कारण पति की मौत को मर्डर बताया. वह कहती है कि 23 अप्रैल को, पिछली रात वह अस्पताल में अपने पति से मिली थी, उस रात 1:30 बजे घर जाने के बाद अस्पताल से फोन आया की पेशेंट गंभीर स्थिति में है इसलिए उसे आना चाहिए जब वह अस्पताल आईं तो बताया गया कि उनके पति को दिल का दौरा आ गया और उनकी मौत हो गई।

जब वह अस्पताल से बाहर आईं तो उन्हें अन्य लोगों से पता चला कि बीती रात 9:30 बजे से ऑक्सीजन की आपूर्ति में कटौती हो रही है। और इससे कई लोगों की मौत हो गई। उसने कहा कि अगर उन्हें ऑक्सिजन की अनुपलब्धता की सूचना दी जाती तो उसे अपने गृहनगर करनाल से आसानी से ऑक्सीजन सिलेंडर मिल जाता।

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गौरव के मुताबिक, उसके माता-पिता दोनों ठीक थे और वह अपने पिता की मौत से 3-4 घंटे पहले अपने पिता से मिले थे। डॉ पवन कहते थे कि उनके पिता की हालत उस वॉर्ड के अन्य लोगों में सबसे अच्छी थी। पहले उनके पिता 100% ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे और समय के साथ इसे घटाकर 80% कर दिया गया। डॉ ने कहा कि वे जल्द ही उसे 1-2 दिनों के भीतर सामान्य वॉर्ड में स्थानांतरित कर देंगे, जिसके बाद वह अपने पिता को 2-3 दिनों में घर ले जा सकेगा लेकिन दोनों की ही जान चली गई।

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