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IL&FS संकट: मोदी सरकार ने दोहराया ‘सत्यम फॉर्मूला’, 91,000 करोड़ के कर्ज में डूबी कंपनी को उबारने आई सामने

वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि देश की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को नकदी की समस्या से उबारने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। सरकार के इस कदम से वित्तीय बाजार में विश्वास बढ़ेगा और उम्मीद है कि वित्तीय संस्थान गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की सहायता करेंगे।

सत्यम फॉर्मूले पर आईएल एंड एफएस को बचाने आगे आई मोदी सरकार। (File Photo, Source- REUTERS)

करीब 91,000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) को बचाने के लिए सरकार आगे आई है। सरकार ने इसका नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में याचिका दायर की थी, नतीजतन सोमवार (1 अक्टूबर) को एनसीएलटी ने आईएल एंड एफएस के बोर्ड को भंग कर नए बोर्ड के गठन के लिए सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। 6 सदस्यीय नए बोर्ड प्रबंधन को मंजूरी दिए जाने की खबरें हैं। इसमें कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी और सीईओ उदय कोटक इसके चेयरमैन होंगे। इसके अलावा रिटायर्ड आईएएस अधिकारी विनीत नायर, पूर्व सेबी प्रमुख जीएम वाजपेयी, आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व चेयरमैन जीसी चतुर्वेदी, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी मालिनी शंकर और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नंद किशोर को नवगठित बोर्ड का सदस्य बनाया गया है। बता दें कि आईएल एंड एफएस का संकट उस समय सामने आया था जब कंपनी बीते 4 सितंबर को सिडबी का एक हजार करोड़ रुपये का शॉट टर्म लोन चुकाने में असफल रही थी। इसकी सब्सिडियरी भी 500 करोड़ रुपये का डिफॉल्ट कर गई थी।

मोदी सरकार ने भी अपनाया ‘सत्यम फॉर्मूला’: वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि देश की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को नकदी की समस्या से उबारने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। सरकार के इस कदम से वित्तीय बाजार में विश्वास बढ़ेगा और उम्मीद है कि वित्तीय संस्थान गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की सहायता करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2009 के बाद पहली बार सरकार किसी कंपनी को बचाने का प्रयास कर रही है। माना जा रहा है कि सत्यम कम्प्यूटर्स सर्विसेज की तरह आईएल एंड एफएस को बचाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। 9 साल पहले सरकार ने आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सत्यम और उसकी सब्सिडियरी कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर शेयरधारकों के हितों की रक्षा की थी। अब 91 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में फंसी आईएल एंड एफएस का सत्यम की तरह की हल निकालने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने आईएल एंड एफएस का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए तर्क दिया है कि कंपनी एक्ट की धारा 241 और 242 के तहत एनसीएलटी को यह अधिकार है कि वह ऐसे मामलों में दखल दे सके। मामले की अगली सुनवाई या इस संबंध में किसी याचिका को दायर करने के लिए अगली तारीख 31 अक्टूबर मुकर्रर की गई है।

सरकारी बैंको के कर्ज भी फंसे: रिपोर्ट के मुताबिक आईएल एंड एफएस पर समूह पर कुल 91,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। वहीं, आईएल एंड एफएस पर अकेले 35,000 करोड़ रुपये, आईएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विसेज पर 17,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। आईएल एंड एफएस प्रमुख शेयरधारकों में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं। एलआईसी की कंपनी में 25 फीसदी की हिस्सेदारी है। जापान के आरिक्स कारपोरेशन की 23.5 फीसदी, अबु धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 12.5 फीसदी, आईएल एंड एफएस कर्मचारी कल्याण ट्रस्ट की 12 फीसदी और एचडीएफसी की 9.02 फीसदी हिस्सेदारी है। बीते 21 सितंबर को आईएल एंड एफएस के सीईओ रमेश बावा समेत चार स्वतंत्र डायरेक्टर्स और एक नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के इस्तीफा देने के बाद कंपनी की हालत और बिगड़ गई थी।

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