ताज़ा खबर
 

बिकने को तैयार देश की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी, IDBI पर भी जल्द फैसला लेगी सरकार, बीपीसीएल और एअर इंडिया भी बिक रही हैं

सरकार ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की 63 फीसदी हिस्सेदार को बेचने का फैसला किया है। बीपीसीएल औऱ एअर इंडिया के बाद अब इसे भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है।

shipping corporation of IndiaSCIL को भी बेचने की तैयारी में सरकार। फोटो सोर्स- shipindia वेबसाइट

बीपीसीएल और एअर इंडिया के बाद अब सरकार ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के भी बड़े हिस्से को बेचने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय ने 63.75 फीसदी की रणनीतिक हिस्सेदारी में विनिवेश और प्रबंध व नियंत्रण स्थानांतरित करने के लिए बोलियों को आमंत्रित किया है। केंद्र सरकार ने 13 फरवरी तक EoI मांगी है।

जानकारों का माना है कि एसार शिपिंग, अडानी, वेदांता, जीई शिपिंग औऱ दुबई पोर्ट वर्ल्ड इसमें हिस्सा ले सकती हैं। अनुमान है कि इस सौदे से मोदी सरकार को करीब 2500 करोड़ रुपये मिलेंगे। एससीआई के 2969 लाख शेयर बेचे जाने हैं जिनको बेचने में महामारी की वजह से देरी हो गई। निवेशक अलग से या फिर कंसोर्टियम बनाकर इसके लिए बोली लगा सकते हैं। आरबीएसए कैपिटल अडवाइजर एलएलपी इस मामले में सरकार की सलाहकार होगी।

विनिवेश सचिव तुहिन कांत पांडेय ने टीवी चैनल्स को बताया कि जल्द कैबिनेट IDBI बैंक को बेचने के लिए भी विचार करेगी। उन्होंने कहा कि अगले 6 महीने में बीपीसीएल का खरीदार मिल सकता है औऱ एअर इंडिया के बिडर की जानकारी 5 जनवरी तक दे दी जाएगी।

सरकार ने अगले वित्त वर्ष तक विनिवेश के जरिए 2.10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। अभी तक सरकार केवल 11,006 करोड़ का लक्ष्य प्राप्त कर पाई है। सरकार ने शिपिंग कॉर्पोरेशन के 29.69 करोड़ इक्विटी शेयर बेचने का फैसला किया है जो कि 63.75 फीसदी के ही बराबर हैं। अभी तक कंपनी का मार्केट वैल्युएशन करीब 4000 करोड़ रुपये का है।

एससीआई भारत की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी है और इसके बेड़े में 59 पोत शामिल हैं। इसमें क्रूड ऑइल टैंकर, बड़े क्रूड ऑइल कैरियर, पेट्रोलियम प्रोडक्ट कैरियर, एलपीजी कैरियर, बल्क कैरियर, कंटेनर शिप और ऑफशोर सपोर्ट वेशल शामिल हैं।

सरकार की योजना है कि डिवेलपमेंट फाइनैंस इंस्टिट्यूशन का गठन किया जाए जो कि कई महत्वाकांक्षी योजनाएं पूरा करने में सहयोग कर सके। इसके जरिए 111 लाख करोड़ मोबलाइज करके इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन का काम पूरा किया जा सके। फाइनैंशनल सर्विस सेक्रटरी देबाशीष पांडा ने बताया कि बैंक इस समय लॉन्ग टर्म प्रोजेक्ट के लिए लोन लेने के लिए सही नहीं हैं इसलिए नए संस्थान का गठन जरूरी हो गया है।

Next Stories
1 LAC पर 20 जगह से घुसपैठ कर सकता है चीन- खुफिया अलर्ट पर भारत मुस्तैद
2 मुझे आतंकी कह पीटा, हाथ काट दिया, पैसे मांगते हैं कैदी- कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां की कोर्ट से गुहार
3 इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये दान देने वालों का नाम उजागर करना जनहित नहीं, सीसीआई ने कहा- यह RTI एक्ट का उल्लंघन
चुनावी चैलेंज
X