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ट्रेन की बोगियों को बनाया जायेगा ICU, आइसोलेशन वार्ड और क्वरैंटाइन सेंटर, ग्रामीण इलाकों में कोरोना से निपटने का मोदी सरकार का नया प्लान

केरल की एक फर्म ने पीएमओ को पत्र लिखकर कहा है कि वह ट्रेन के डिब्बों को अस्पताल के वार्ड की तरह डिजाइन करने के लिए तैयार है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: March 26, 2020 2:03 PM
भारत के ज्यादातर दूरदराज और ग्रामीण इलाके ट्रेन नेटवर्क से जुड़े हैं। (फोटो- भारत की पहली मेडिकल ट्रेन लाइफलाइन एक्सप्रेस)

भारत में कोरोनावायरस का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। देश में अब तक इसके 600 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, 17 लोगों की मौत हुई है। देश की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच मोदी सरकार इसे दुरुस्त करने के लिए तत्कालीन कदम उठा रही है। सरकार का सबसे ताजा कदम ग्रामीण इलाकों के लिए है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेल मंत्रालय को आदेश दिया है कि ट्रेनों के कोच और केबिनों को आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू में बदला जाए, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी कोरोना के खतरे के बीच स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं जा सकें।

न्यूज वेबसाइट द प्रिंट ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि मोदी को यह विचार कुछ हफ्ते पहले दिया गया था। हालांकि, उन्होंने इसे मंगलवार को मंजूरी दी। इसके पीछे एक वजह यह बताई जा रही है कि चूंकि भारत का ज्यादातर क्षेत्र रेलवे से जुड़ा है। इसलिए जिन दूर-दराज के इलाकों में महामारी फैलेगी, वहां सुविधा न होने की स्थिति में ट्रेनों की बोगियों को मेकशिफ्ट (कहीं भी लाने ले-ले जा सकने वाला) वार्ड बनाया जाएगा।

बता दें कि सरकार काफी समय से कोरोनावायरस के मद्देनजर अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिशों में जुटी है। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार (24 मार्च) को ही देश भर में लॉकडाउन का ऐलान किया था। इसके बाद सभी पैसेंजर ट्रेन सेवाओं को 14 अप्रैल तक के लिए रद्द कर दिया गया। हालांकि, मालगाड़ियों यानी फ्रेट ट्रेन इस दौरान चलती रहेंगी, ताकि जरूरी सामान अपने गंतव्य तक पहुंच सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना के लिए केरल के कोच्ची आधारित एक फर्म ने प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रस्ताव भी भेज दिया है। फर्म ने कहा है कि वह ट्रेन के डिब्बों को हॉस्पिटल की तरह डिजाइन कर देगी। फर्म के निदेशक ने पीएमओ को लिखे पत्र में कहा है, “हमारे पास 12,167 ट्रेनें हैं। इनमें लगभग 23-30 कोच होते हैं। हम इन्हें आसानी से मोबाइल हॉस्पिटल में बदल सकते हैं। इनमें मेडिकल स्टोर से लेकर आईसीयू और पैंट्री कार की भी व्यवस्था हो सकती है। हर ट्रेन में करीब 1000 बेड की व्यवस्था हो सकती है। 7500 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों के जरिए मरीजों को ट्रेन में ही भर्ती कराया जा सकता है।”

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