किसान आंदोलन के बीच मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, रबी फसलों की एमएसपी में इजाफा, 40 रुपये बढ़ाए गेहूं के दाम

केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2022-23 के लिए रबी की फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी की है। अब गेहूं का एमएसपी 1975 से बढ़ाकर 2015 रुपये कर दिया गया है।

तस्वीर मुजफ्फर नगर किसान महापंचायत की है। फोटो- रॉयटर्स

किसान आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने रबी फसल की एमएसपी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और सूरजमुखी की सरकारी खरीद की कीमतों में इजाफा किया है। गेहूं की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) 1975 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2015 रुपये कर दी गयी है। यानी प्रति क्विंटल 40 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में एमएसपी को बढ़ाने को मंजूरी दी गई है। गेहूं के अलावा जौ की बात करें तो इसकी एमएसपी 1600 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1635 रुपये कर दी गई है। चना की एमएसपी में 130 रुपये की वृद्धि की गई है। अब इसकी कीमत 5230 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है। मसूर की एमएसपी में 400 रुपये, सरसों की 400 रुपये और सूरजमुखी की एमएसपी में 114 रुपये का इजाफा करने का फैसला किया गया है।

बता दें ये कीमतें मार्केटिंग सीजन 2022-23 में लागू होंगी। रबी की फसल की बुआई का समय करीब आ रहा है। सितंबर के आखिरी सप्ताह से रबी फसलों की बुआई शुरू हो जाती है। वहीं कटाई का समय मार्च से अप्रैल के बीच होता है। कुछ फसलें फरवरी में कट जाती हैं।

इन फसलों की तय की जाती है एमएसपी
रबी और खरीफ की कुछ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP सरकार तय करती है। फसल की बुआई से पहले ही हर साल उसकी एमएसपी तय की जाती है। सरकार 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है जिसमें अनाज की 7, तिलहन की 7, चार कमर्शल और 5 दलहन की फसलें शामिल हैं। इसमें गेहूं, धान, मक्का, बाजरा, जौ, तूर, चना, मूंग, सरसों, उड़द, सोयाबीन, सूरजमुखी, कपास, जूट कन्ना आदि फसलें आती हैं।

किन बातों का रखा जाता है ध्यान
एमएसपी तय करते वक्त यह ध्यान में रखा जाता है कि कीमत लागत मूल्य से कम से कम 50 फीसदी ज्यादा हो। इसे तय करते वक्त मांग और आपूर्ति का भी ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा, बाजार की कीमतों का रुझान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों को भी ध्यान में रखा जाता है। किसानों की मांग है कि एमएसपी पर कानून बना दिया जाए जिससे की सभी फसलों की निर्धारित कीमत किसानों को मिले।

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