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ओआरओपी लार्ई सरकार, पर जंग बरकरार

सरकार ने लंबे समय से चली आ रही वन रैंक, वन पेंशन (ओआरओपी) की मांग को शनिवार को स्वीकार कर लिया। लेकिन आंदोलन कर रहे पूर्व सैन्यकर्मियों ने इस फैसले के प्रमुख ब्योरों पर असंतोष..

Author नई दिल्ली | September 6, 2015 09:00 am
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने ऐलान किया सरकार ने ओआरओपी लागू करने का फैसला किया है जिसके तहत हर पांच साल पर पेंशन में संशोधन किया जाएगा।

सरकार ने लंबे समय से चली आ रही वन रैंक, वन पेंशन (ओआरओपी) की मांग को शनिवार को स्वीकार कर लिया। लेकिन आंदोलन कर रहे पूर्व सैन्यकर्मियों ने इस फैसले के प्रमुख ब्योरों पर असंतोष जताते हुए कहा कि उनका 84 दिनों से चला आ रहा आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारी पूर्व सैन्यकर्मियों को लगता है कि सरकार ने उनकी एक मांग स्वीकार कर ली और छह को खारिज कर दिया।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने ऐलान किया सरकार ने ओआरओपी लागू करने का फैसला किया है जिसके तहत हर पांच साल पर पेंशन में संशोधन किया जाएगा। जबकि पूर्व सैन्यकर्मी दो साल के अंतराल पर पेंशन में संशोधन की मांग कर रहे हैं। पर्रीकर ने कहा कि ओआरओपी के आकलन के लिए साल 2013 बुनियादी वर्ष होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति लेने वाले पूर्व सैन्यकर्मी इस योजना का लाभ उठाने के हकदार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ओआरओपी के क्रियान्वयन के विवरण पर काम करने के लिए एक सदस्यीय न्यायिक समिति का गठन कर रही है जो छह महीने में रिपोर्ट देगी।

सरकार के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए आंदोलनकारी पूर्व सैन्यकर्मियों के नेता मेजर जनरल (रिटायर) सतबीर सिंह ने कहा कि पूर्व सैन्यकर्मी ओआरओपी के क्रियान्वयन को लेकर सरकार के इरादे से संतुष्ट हैं। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि लाभ के प्रस्तावित प्रावधान उनको स्वीकार्य नहीं हैं।

पेंशन में हर पांच साल में संशोधन किए जाने और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस ) लेने वालों को इस योजना से बाहर रखे जाने के प्रावधानों को खारिज करते हुए सिंह ने कहा- हमारे अनुसार सरकार ने हमारी एक मांग स्वीकार कर ली और छह को खारिज कर दिया। फिलहाल हम इन ब्योरों के आधार पर आंदोलन वापस नहीं ले सकते।

रक्षा मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि घायल होने के कारण वीआरएस लेने वाले सैन्यकर्मियों के हितों की रक्षा की जाएगी। पर्रीकर ने कहा- ओआरओपी जटिल मुद्दा है। विभिन्न समय में और विभिन्न रैंक से सेवानिवृत्त हुए लोगों के हितों की पूरी पड़ताल करने की जरूरत है। तीन सैन्यबलों की अंतर-सेवा के मुद्दे पर विचार की जरूरत है। यह सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं हैं।

ओआरओपी के तहत सरकार की ओर से प्रस्तावित लाभ के कदमों को लेकर असंतोष जताते हुए सिंह ने कहा- हम इस फैसले को स्वीकार नहीं करते हैं कि जिन लोगों ने समय पूर्व सेवानिवृत्ति ले ली है उनको ओआरओपी के लाभ नहीं मिलेंगे। हम एक सदस्यीय न्यायिक समिति के गठन को भी अस्वीकार करते हैं। कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण की जरूरत पर जोर देते हुए सिंह ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा और आगे के कदम के बारे में जल्द फैसला किया जाएगा।

पर्रीकर के मुताबिक, इस योजना लागू करने पर 8,000 से 10,000 करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च आएगा। बकाये के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बकाये की राशि का भुगतान छह-छह महीनों की चार किस्तों में किया जाएगा। बहरहाल, युद्ध में शहीदों की पत्नियों और दूसरे दिवंगत सैन्यकर्मियों की पत्नियों को बकाये की राशि एक किस्त में दी जाएगी।

इस योजना के तहत करीब 26 लाख सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों और छह लाख से अधिक शहीदों की पत्नियों को लाभ होगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्व सैन्यकर्मियों को बकाये का भुगतान करने के लिए 10,000-12,000 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। उन्होंने कहा- समान रैंक से और सेवा की समान अवधि के साथ सेवानिवृत्त होने वाले सभी पेंशनभोगियों के लिए साल 2013 में न्यूनतम और अधिकतम पेंशन के औसत के तौर पर पेंशन को फिर से तय किया जाएगा।

प्रेस कांफ्रेंस में पर्रीकर के साथ सेना के तीनों अंगों के प्रमुख एवं रक्षा सचिव भी मौजूद थे। रक्षा मंत्री ने पत्रकारों के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार एक महीने के भीतर ओआरओपी पर एक विस्तृत आदेश के साथ आएगी। पर्रीकर ने कहा कि सरकार ने विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श किया है और भारी वित्तीय बोझ के बावजूद ओआरओपी लागू करने का फैसला किया।

उन्होंने कहा- पूर्व की सरकार ने अनुमान लगाया था कि ओआरओपी को 500 करोड़ रुपए के बजट के प्रावधान के साथ लागू किया जाएगा। वास्तविकता यह है कि ओआरओपी के क्रियान्वयन पर कुल 8,000 से 10,000 करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च आएगा और भविष्य में आगे बढ़ता रहेगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि ओआरओपी का मुद्दा करीब चार दशक से लंबित है और पूर्व की यूपीए सरकार ने इसे 2014-15 से लागू करने का ऐलान किया था, लेकिन उसने यह स्पष्ट नहीं किया था कि यह योजना क्या होगी। उन्होंने कहा- यह दुख का विषय है कि कई सरकारों ने ओआरओपी के मुद्दे पर दोहरी सोच बनाए रखी।

‘बिहार चुनाव का हथकंडा’
सरकार ने हमारी एक मांग को स्वीकार कर लिया और छह को खारिज कर दिया। वह अपने वादों से पीछे हट गई है। हमारे पास आंदोलन जारी रखने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सरकार बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए हथकंडे अपना रही है। अगर सरकार समयपूर्व सेवानिवृत्ति लेने वालों को ओआरओपी का फायदा देती है तो भूख हड़ताल वापस ले ली जाएगी।… मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सतबीर सिंह, आंदोलनकारी पूर्व सैन्यकर्मियों के नेता

* जनरल (सेवानिवृत्त) वी पी मलिक ने समयपूर्व सेवानिवृत्ति लेने वालों को योजना से बाहर रखे जाने के फैसले का विरोध किया है।

* पूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने कहा कि वो दूसरे मुद्दे ‘चिंता का कारण’ हैं जो पूर्व सैन्यकर्मियों को चिंता में डाले हुए हैं।

राजनीति कर रही सरकार
सरकार ओआरआपी के मुद्दे पर राजनीति कर रही है और उसने इस योजना के प्रावधानों को मूलत: कमजोर कर दिया है।
-एके एंटनी, पूर्व रक्षा मंत्री

गर है खामी तो होगी दूर
यदि घोषित ओआरओपी नीति में कोई खामी रह गई है, तो सरकार इस पर विचार करेगी।… राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री

पेंशन पर काहे की टेंशन

* हर पांच साल पर पेंशन में संशोधन किया जाएगा।

* आकलन के लिए साल 2013 बुनियादी वर्ष होगा।

* स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति लेने वाले पूर्व सैन्यकर्मी इस योजना का लाभ नहीं ले सकते।

* घायल होने के कारण वीआरएस लेने वाले सैन्यकर्मियों के हितों की रक्षा की जाएगी।

* बकाये राशि का भुगतान छह-छह महीनों की चार किस्तों में किया जाएगा।

* युद्ध में शहीदों की पत्नियों और दूसरे दिवंगत सैन्यकर्मियों की पत्नियों को बकाया राशि एक किस्त में दी जाएगी।

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