जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद मंगलवार को सरकार के वरिष्ठ स्तर पर एक ही आधिकारिक रुख देखने को मिला। इसमें यह था कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग राजनीतिक है और सरकार इसके आगे झुकने वाली नहीं है। नीट पेपर लीक से जुड़ी कमियों को ठीक कर लिया गया है।
इसके अलावा, तीन सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं नीट री-टेस्ट, सीयूईटी और जेईई मेन के तहत एडमिशन का काम काफी हद तक सही रास्ते पर है और सरकार संसद में इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है।
इस्तीफे की मांगों के आगे झुकने का कोई इरादा नहीं
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा कि केंद्र का शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांगों के आगे झुकने का कोई इरादा नहीं है और यह तर्क दिया कि उसने न तो खामियों से इनकार किया है और न ही जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “समस्या थी। हमने यह बात सार्वजनिक रूप से कही है और इसकी जिम्मेदारी भी सार्वजनिक रूप से ली है। सरकार इससे मुंह नहीं मोड़ रही है।” सरकार का तर्क है कि अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि एकेडमिक सेशन सुचारू रूप से चले, न कि उस विवाद को फिर से छेड़ा जाए जिसे वह प्रशासनिक रूप से सुलझा हुआ मानती है।
ज्यादातर छात्र कैंपस लौट आए हैं- अधिकारी
अधिकारियों ने नीट, सीयूईटी और जेईई मेन में दाखिले की प्रगति का जिक्र किया। अधिकारी ने कहा, “ज्यादातर छात्र कैंपस लौट आए हैं।” साथ ही यह भी बताया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में लगभग 72000 छात्रों का दाखिला इस बात का संकेत है कि पढ़ाई-लिखाई की गतिविधियां फिर से शुरू हो गई हैं।
केंद्र का आकलन है कि जो लोग अभी भी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे हैं, वे अब परीक्षा प्रक्रिया से प्रभावित प्राइमरी स्टेकहोल्डर नहीं हैं। एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि लोगों को विरोध नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में लोगों को विरोध करने का पूरा अधिकार है।” उन्होंने कहा, “लेकिन मुद्दा कौन उठा रहा है, इसे कैसे उठाया जा रहा है और इसके पीछे कौन है, ये अलग सवाल हैं।”
यही फर्क सरकार के उस फैसले का आधार भी है जिसके तहत वह शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर विचार करने से इनकार कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या मंत्री को अपने कार्यकाल के दौरान पेपर लीक के दो विवादों के बाद नैतिक आधार पर इस्तीफे की पेशकश करनी चाहिए, तो सरकार की चर्चाओं से वाकिफ एक वरिष्ठ अधिकारी ने बार-बार इस मांग को राजनीतिक सवाल बताया।
क्या हमें राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाना चाहिए
सीधे जवाब देने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, “यह एक राजनीतिक सवाल है।” उन्होंने सवाल किया, “क्या हमें राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाना चाहिए?” उन्होंने यह तर्क देते हुए कहा कि सरकार पहले ही जिम्मेदारी स्वीकार कर चुकी है और सुधारात्मक कदम उठा चुकी है।
उन्होंने कहा, “जिस सिस्टम पर हमने भरोसा किया, उसी ने इसमें गड़बड़ी की। हम कोई सरकारी माफिया नहीं हैं। सिस्टम के भीतर जिन लोगों पर हमने भरोसा किया, उन्हीं ने हमें धोखा दिया। हमने इस लीक को छिपाया नहीं। हमने जिम्मेदारी स्वीकार की और इसे ठीक करने की कोशिश की।”
हालांकि सरकार इस्तीफे की मांग मानने से इनकार कर रही है, लेकिन उसका कहना है कि वह संसद में चर्चा के खिलाफ नहीं है। अधिकारी ने कहा, “बहस होनी चाहिए। सदन में संवाद होना चाहिए। सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
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जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तमाम समर्थक जुटे हुए हैं। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार रात को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंगलवार रात को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी सीजेपी के प्रदर्शन में पहुंचे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत तमाम बड़े नेता प्रधानमंत्री आवास के करीब धरने पर बैठ गए। इसे बीजेपी ने राजनीतिक तमाशा बताया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
