राम मंदिर पर कानून नहीं बनाएगी मोदी सरकार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार

बीते कुछ दिनों में विहिप और आरएसएस इस मुद्दे को कई बार उठा चुकी है। भागवत का मंदिर पर सरकार को सलाह एक कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।

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'2019 के लोकसभा चुनावों से पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की संभावना है।' (फोटो सोर्स : Indian Express)

राम मंदिर को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के दिए बयान पर मोदी सरकार विचार करने के मूड में भी नहीं है। भागवत ने कहा था कि सरकार राम मंदिर के लिए बिल लाए। इस पर भारतीय जनता पार्टी के के वरिष्ठ नेताओं ने इशारों में कहा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगी। बीते कुछ दिनों में विहिप और आरएसएस इस मुद्दे को कई बार उठा चुकी है। भागवत का मंदिर पर सरकार को सलाह एक कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।

ईटी की खबर के अनुसार, इस मुद्दे पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, यह सिर्फ एक कोशिश नहीं है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर 201 9 के लोकसभा चुनावों से पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की संभावना है।

गुरुवार (18 अक्टूबर) को महाराष्ट्र के नागपुर में संगठन के विजयदशमी उत्सव पर आरएसएस चीफ ने कहा था कि, चाहे जो हो, अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए। राम हमारे गौरव पुरुष हैं, उनका स्मारक होना ही चाहिए। सरकार इसे बनाने के लिए कानून लाए। संघ इस मसले पर साधु-संतों के फैसले के साथ हैं।

भागवत के दिए इस बयान पर केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा, करोड़ों हिंदुस्तानियों की राम मंदिर से भावनाएं जुड़ी हुई हैं। बीजेपी ने राम मंदिर का जिक्र मैनिफैस्टो में किया था।

इसी मामले पर बीजेपी के फायर ब्रांड नेता स्वामी उच्चतम न्यायालय में राम मंदिर पर रोजाना सुनवाई की याजिका दाखिल कर चुके हैं। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं वक्फ बोर्ड और कपिल सिब्बल ने इसकी सुनवाई 2019 चुनाव के बाद करने की मांग की थी।

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