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नोटबंदी, जीएसटी के बाद एक और सुधार की ओर मोदी सरकार, ‘एक देश, एक स्टाम्प ड्यूटी’ की तैयारी

देश में अलग-अलग स्टाम्प ड्यूटी की वजह से लोग उन राज्यों को चुनते हैं जहां दरें कम होती हैं। इसलिए केंद्र सरकार भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनस को बढ़ाने के लिए यह कमद उठा सकती है।

स्टाम्प ड्यूटी को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया था। (फोटो सोर्स : Indian Express)

मोदी सरकार नोटबंदी और जीएसटी के बाद एक और बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। एक देश, एक टैक्स के बाद सरकार अब देश में एक समान स्टाम्प ड्यूटी पर फैसला ले सकती है। केंद्र सरकार भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनस को बढ़ाने के लिए यह कमद उठा सकती है।

ईटी की खबर के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, प्रस्ताव पर राज्यों ने भी रजामंदी दे दी है। अधिकारी ने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में इस बदलाव को पारित कराने के लिए लाया जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस कदम से राज्यों के रेवेन्यू पर फर्क नहीं पड़ेगा।

देश में अलग-अलग स्टाम्प ड्यूटी की वजह से लोग उन राज्यों को चुनते हैं जहां दरें कम होती हैं। मार्केट रेग्युलटर सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने इससे पहले राज्यों को सलाह दी थी कि, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होने वाले फाइनैंशल ट्रांजैक्शन पर स्टाम्प ड्यूटीज को एक समान बनाएं।

बता दें, कि स्टैंप ड्यूटी को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया था। बिल्स ऑफ एक्सचेंज, चेक, लेडिंग बिल्स, लेटर्स ऑफ क्रेडिट, इंश्योरेंस पॉलिसीज, शेयर ट्रांसफर, इकरार-नामा जैसे वित्तीय साधनों पर स्टाम्प ड्यूटी संसद से तय होता है। हालांकि, अन्य वित्तीय साधनों पर स्टैंप ड्यूटी की दर राज्य दर करते हैं।

सरकार द्वारा स्थापित एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने दिसंबर 2005 में विभिन्न ऋण उपकरणों पर राज्यों द्वारा लगाए गए स्टाम्प टैक्स के मुद्दे पर राज्यों में समान टैक्स रेट्स का सुझाव दिया था।

बता दें कि, 1899 में यह कानून बना था। जिसमें बदलाव के कई बार प्रयास किए गए। लेकिन राज्य सरकारें इस पर सहमत नहीं हुईं। राज्यों का कहना था कि, वह स्टाम्प ड्यूटी पर अधिकार खोना नहीं चाहतीं।

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