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OROP: पूर्व सैनिकों पर पुलिस कार्रवाई को कांग्रेस ने बताया मोदी सरकार का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि ओआरओपी के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का यह 869वां दिन है और सरकार उनकी मांगों को सुनने के बदले उन पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' कर रही है।

Author नई दिल्ली | Updated: November 1, 2017 1:02 PM
Congress, Congress Blames, Surgical Strike on Former Soldiers, Modi Government, Surgical Strike, Surgical Strike on Soldiers, one rank one pension,कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जंतर मंतर पर पुलिस की कार्रवाई सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के आम लोगों के अधिकार का हनन है। (Express Photo by: Ravi Kanojia)

कांग्रेस ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) की शांतिपूर्ण मांग कर रहे सेवानिवृत्त सैनिकों पर पुलिस कार्रवाई की तुलना ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ वह सैनिकों के साथ दिवाली मनाते हैं और दूसरी तरफ सैनिकों को ओआरओपी न देकर गंभीर अन्याय करते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता टॉम वटक्कन ने कहा, “मोदी सरकार का राष्ट्रवाद का मुखौटा एकबार फिर सोमवार को उतर गया, जब सरकार ने दिल्ली पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों, युद्ध लड़ने वालों और उनकी विधवाओं को जंतर मंतर से जबरदस्ती हटाया और उसके बाद गिरफ्तार भी करवाया।”

उन्होंने कहा कि ओआरओपी के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का यह 869वां दिन है और सरकार उनकी मांगों को सुनने के बदले उन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर रही है। उन्होंने कहा, “यह पहली बार नहीं है कि पुलिस बल का प्रयोग पूर्व सैनिकों के खिलाफ किया गया है। प्रधानमंत्री हमारे सैनिकों के साथ दिवाली मनाते हैं, लेकिन ओआरओपी न देकर दिवाली के बाद उन्हीं लोगों के साथ अन्याय करते हैं।” वडक्कन ने कहा, “पहले उन्होंने 2015 में उन्हें हटाने के लिए उन पर लाठीचार्ज किया। उसके बाद एक पूर्व सैनिक को नवंबर 2016 में आत्महत्या करना पड़ा और सरकार अब एनजीटी के आदेश की आड़ में उन पर निशाना साध रही है।”

उन्होंने कहा कि जंतर मंतर राष्ट्रीय राजधानी के दिल (कनॉट प्लेस) के पास स्थित रणनीतिक जगह है और संसद के पास है। इसकी अपनी एक महत्ता है और यह लोगों की आवाज को ताकत देता है। जंतर मंतर पर पुलिस की कार्रवाई सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के आम लोगों के अधिकार का हनन है। कांग्रेस नेता ने कहा, “हम यह आशा करते हैं कि देश इसकी समीक्षा करेगा कि जंतर-मंतर का ध्वनि प्रदूषण ज्यादा खतरनाक है या लोकतंत्र और असहमति पर असहिष्णुता बड़ा खतरा है।” उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि पर्यावरण के प्रति चिंताएं दूर करने के लिए लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के मूलभूत सिद्धांतों के साथ संघर्ष की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।”

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