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सरकार OROP के मुद्दे पर फैसले के लिए समिति के गठन पर कर रही है विचार

वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर धरने पर बैठे पूर्व आर्मी मैन की अब जाकर मांग पूरी करने की घोषणा जल्द पूरी होगी। वन रैंक वन पेंशन को लेकर ड्रॉफ्ट प्रपोजल लगभग तैयार है।

Author नई दिल्ली | September 5, 2015 3:30 PM

एक रैंक एक पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे पूर्व सैन्यकर्मियों के समूह के एक नेता ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ बैठक के बाद कहा कि सरकार एक समान पेंशन के मुद्दे पर एक न्यायाधीश के नेतृत्व वाली एक समिति के गठन पर विचार कर रही है।

इंडियन एक्स सर्विसमेन मूवमेंट (आईईएसएम) के प्रमुख मेजर जनरल सतबीर सिंह :सेवानिवृत्त: ने कहा कि सरकार ने ओरआरओपी की अवधारणा को स्वीकार कर लिया लेकिन हर पांच साल पर पेंशन की समीक्षा पर जोर दे रही है जिस वजह से वह एक समिति के गठन पर विचार कर रही है।

सिंह ने बैठक के बाद कहा कि उस स्थिति में पूर्व सैन्यकर्मियों का एक प्रतिनिधि और सेना का एक प्रतिनिधि भी समिति में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समिति को एक महीने से अधिक समय नहीं लेना चाहिए।

ओरआरओपी पर सरकार की संभावित घोषणा से पहले सिंह ने कहा कि सरकार ने मोटे तौर पर योजना की अवधारणा स्वीकार कर ली है और उसे सार्वजनिक करने से पहले वे इसके ब्यौरे का अध्ययन करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने पेंशन को एक समान करने समेत कई पेचीदा मुद्दों पर अपने विचार रखे।

सिंह ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘सरकार ने मोटे तौर पर ओआरओपी की अवधारणा स्वीकार कर ली है।’’

सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्री से कहा गया कि किसी भी कनिष्ठ को वरिष्ठ से अधिक पेंशन नहीं मिलना चाहिए और रक्षा बलों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सेवा :वीआरएस: जैसी कोई चीज नहीं है।

उन्होंने सुलह का रूख अपनाते हुए कहा कि सरकार ने पूर्व सैन्यकर्मियों की 60 प्रतिशत मांगें मान ली हैं।

आईईएसएम प्रमुख ने हालांकि कहा कि ‘विवाद की जड़’ यानि पेंशन की समीक्षा का मुद्दा अब भी बना हुआ है।

बैठक के बाद पर्रिकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिले। बाद में भाजपा के एक नेता ने कहा कि पेंशन समीक्षा की मांग के अलावा पूर्व सैन्यकर्मियों की सभी मांगें मान ली गयी हैं।

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी पार्टी प्रमुख के घर पर मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी समाधान की घोषणा करने के करीब है जिससे सरकारी खजाने पर कम से कम 10,000 करोड़ रुपए का बोझ आएगा।

पूर्व सैन्यकर्मी कम से कम हर दो साल पर पेंशन की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं जबकि सरकार ने पांच साल पर समीक्षा का प्रस्ताव रखा है।

ऐसा समझा जाता है कि कल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक बैठक में ओआरओपी पर मसौदा प्रस्ताव बांटा गया जिसमें जुलाई 2014 से योजना की शुरूआत और हर पांच साल पर पेंशन की समीक्षा की परिकल्पना की गयी है।

मसौदे के अनुसार योजना के कार्यान्वयन का आधार 2013 होगा और बकाये का भुगतान चार किश्तों में किया जाएगा।

योजना से करीब 26 लाख सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों और छह लाख से अधिक युद्ध विधवाओं को तत्काल लाभ होगा, जिसमें समान सेवा अवधि में एक ही रैंक से सेवानिवृत्त होने वाले रक्षाकर्मियों के लिए समान पेंशन कल्पित है, चाहे उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख कोई भी हो।

वर्तमान में सेवानिवृत्त सेनाकर्मियों की पेंशन उनके सेवानिवृत्त होने के समय के हिसाब से वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। इसलिए 1996 में सेवानिवृत्त हुए किसी मेजर जनरल की पेंशन 1996 के बाद सेवानिवृत्त हुए किसी लेफ्टिनेंट कर्नल से कम है।

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