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मोदी सरकार ने पेश किया आंकड़ा, देश में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत, 2012 के बाद नहीं बढ़ी बेरोजगारी!

सरकार नए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) कर रही है जिसमें पहले से व्यापक सैंपल का इस्तेमाल किया जा रहा है जिनकी पहले के सर्वेक्षणों से तुलना नहीं की जा सकती।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में जानकारी दी कि देश में 2017-18 के दौरान बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी थी। सरकार ने रोजगार के संबंध में, नए और व्यापक सर्वे के जरिए जुटाए गए आंकड़ों को साझा करते हुए सदन को इस बारे में सूचित किया। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने एक प्रश्न के जवाब में कहा सरकार ने सर्वेक्षण की प्रक्रिया में बदलाव के बाद सांख्यिकी मंत्रालय के वार्षिक आधार पर नया बेरोजगारी सर्वेक्षण 2017-18 किया। सरकार नए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस ) कर रही है जिसमें पहले से व्यापक सैंपल का इस्तेमाल किया जा रहा है जिनकी पहले के सर्वेक्षणों से तुलना नहीं की जा सकती।

केंद्रीय मंत्री ने बताया ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के मुताबिक मौजूदा समय में देश में श्रम बल की भागीदारी 36.9 फीसदी है जबकि 2017-18 के दौरान बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी है।’ उन्होंने आगे कहा ‘हम बुनियादी ढांचे के विकास और इज ऑफ डोइंग बिजनेस की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके चलते दुनियाभर में भारत की स्थिति में सुधार हुआ है। भारत ने पिछले वर्षों में 63वीं 196 के मुकाबले 2019 में अपनी स्थिति में सुधार किया है।’

उन्होंने 2012 के बाद अब तक बेरोजगारी की दर बढ़ने की रिपोर्टों को अप्रमाणित बताते हुए कहा कि पीएलएफएस सर्वेक्षण के आंकड़ों को ही इस बारे में आधिकारिक माना जा सकता है। सरकार ने प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार के सही आंकड़े जुटाने के लिए पुरानी सर्वेक्षण पद्धति को 2016 से रोक दिया। इसके बाद नया सर्वेक्षण सांख्यिकी मंत्रालय की मदद से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली पद्धति की कमियों को दुरुस्त कर नये सर्वेक्षण की पूरी रिपोर्ट आने में समय लगेगा।

बता दें कि इससे पहले बीते साल जून में केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों से सामने आया था कि पिछले 6 साल में ग्रामीण क्षेत्रों में साढ़े तीन गुना से ज्यादा बेरोजगारी बढ़ी है। वहीं, सबसे ज्यादा बेरोजगारी शहरी क्षेत्र की युवतियों की बीच है।  नेशनल सैम्‍पल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) और पीएलएफएस के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2005-06 में ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर 3.9 प्रतिशत थी। यह दर वर्ष 2009-10 में बढ़कर 4.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। वर्ष 2011-12 में यह 5 प्रतिशत पहुंची और अगले छह वर्ष बाद 2017-18 में साढ़े तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 17.4 प्रतिशत तक पहुंच गई।

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