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सरकार ने ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ को जमीनी हकीकत से दूर बताया, कहा- भुखमरी से जूझ रहे देशों की पहचान का तरीका गड़बड़

मोदी सरकार में भारत की ग्लोबल हंगर इंडेक्स में रैंकिंग लगातार गिरी है, 2014 की 55वीं रैंक के मुकाबले 2019 में देश की रैंक 102 पहुंच गई।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Published on: March 13, 2020 11:15 PM
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने लोकसभा में ग्लोबल हंगर इंडेक्स को गलत ठहराया।

भारत सरकार ने दुनिया में भुखमरी का स्तर बताने वाले ग्लोबल हंगर इंडेक्स (वैश्विक भूख सूचकांक) पर ही सवाल उठा दिया है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा और राव इंदरजीत सिंह ने राज्यसभा में बताया कि यह सूचकांक आम जनसंख्या की खाने त पहुंच और भूख के स्तर का सही मापदंड पेश नहीं करता।

अक्टूबर 2019 में जारी हुई ग्लोबल हंगर इंडेक्स रैंकिंग के मुताबिक, भारत 117 देशों में 102वें स्थान पर था। इस लिस्ट में 0 से 100 अंकों के आधार पर रैंकिंग होती है। जो देश सबसे ज्यादा अंक पाता है, उसकी स्थिति बेहतर मानी जाती है। वहीं, निचली रैंकिंग वाले देशों में भुखमरी की स्थिति गंभीर होती है। भारत को पिछले साल इस रिपोर्ट में 30.3 अंक ही मिले थे, जो कि भुखमरी की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। पड़ोसी देश पाकिस्तान (94वें), बांग्लादेश (88वें), नेपाल (73वें) और श्रीलंका (66वें) भारत से बेहतर रैंकिंग में रखे गए थे।

क्या रहा केंद्रीय मंत्रियों का तर्कः केंद्रीय मंत्रियों ने संसद में कहा, “ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019 के मुताबिक, भारत में 6 महीने से लेकर 23 महीने तक के सिर्फ 9.6% बच्चों को ही न्यूनतम स्वीकार्य आहार मिलता है।” सूचकांक के मुताबिक, न्यूनतम स्वीकार्य आहार का मतलब है कि बच्चों को अलग-अलग पोषक तत्व और खाने की प्रायिकता इतनी रही हो कि उनका शारीरिक और मानसिक विकास न रुके।

मंत्री ने कहा कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स चार पैमानों पर देशों को परखता है। ये चार पैमाने- कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, चाइल्ड वेस्टिंग और बच्चों की वृद्धि में रोक हैं। हमारे अनुमान के मुताबिक, जिस तरह सूचकांक बनाया जाता है, उसमें 70% वेटेज बच्चों के अल्पपोषण को दिया जाता है। जो अपने आप में कई सामाजिक निर्धारकों और वंचितों पर इसके प्रभाव के कारण पैदा होता है। इसलिए यह सूचकांक भूख और पूरी जनसंख्या मे खाने की कमी को ठीक से नहीं दर्शाता।

राव इंदरजीत ने आगे कहा, “सरकार लगातार भूख और कुपोषण के मुद्दे को प्राथमिकता के साथ अलग-अलग कार्यक्रम चलाकर सुधारने की कोशिश में जुटी है। देश में खाद्य सुरक्षा की बेहतरी के लिए स्कीम्स चलाई जा रही हैं।”

मोदी राज में लगातार गिरी है भारत की रैंकिंगः साल 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में लगातार गिरावट आई है। साल 2014 में भारत जहां 55वें पायदान पर था, तो वहीं 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और पिछले साल 100वें पायदान पर आ गया। 2019 में भारत की रैंकिंग 3 पायदान और गिर गई।

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