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मोदी सरकार के मंत्री ने आदिवासियों को दी सलाह- विजय माल्या की तरह स्मार्ट बनो

जनजातीय कल्याण मंत्री ने यहां राष्ट्रीय जनजातीय उद्यमी कॉन्क्लेव 2018 में कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आदिवासी उद्यमियों को प्रोत्साहित करेगी।

Author July 14, 2018 1:29 PM
विजय माल्या फिलहाल लंदन में है (एक्सप्रेस फाइल फोटो)।

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को ‘स्मार्ट’ बताते हुए केन्द्रीय मंत्री जुएल ओराम ने अनुसूचित जाति और जनजातियों को सफल उद्यमी बनने और बैंक से ऋण लेने के लिए पहले स्मार्ट बनने की सलाह दी। जनजातीय कल्याण मंत्री ने यहां राष्ट्रीय जनजातीय उद्यमी कॉन्क्लेव 2018 में कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आदिवासी उद्यमियों को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि हालांकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को शिक्षा, नौकरियों और राजनीति में आरक्षण मिला हुआ है, लेकिन नुकसान यह है कि ज्ञान और प्रतिभा के संदर्भ में उनके साथ अन्यों के बराबर व्यवहार नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें उद्यमी बनना चाहिए, हमें बुद्धिमान बनना चाहिए। हमें स्मार्ट बनना चाहिए। हमें जानकारी हासिल करनी चाहिए। सूचना शक्ति है। जिनके पास जानकारी है, वे सत्ता को नियंत्रित करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप लोग विजय माल्या की आलोचना करते हैं। लेकिन विजय माल्या क्या है? वह बुद्धिमान है। उसने कुछ बुद्धिमान लोगों को नौकरी पर रखा। उसने यहां और वहां बैंकर्किमयों, राजनेताओं, सरकार के साथ इधर उधर किया।’’ ओराम ने पूछा, ‘‘उसने (माल्या) उन्हें खरीदा। किसने आपको (स्मार्ट होने से) रोका है? आदिवासियों से व्यवस्था को प्रभावित नहीं करने के लिए किसने पूछा? किसने आपको बैंकर्किमयों को प्रभावित करने से रोका।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इच्छा है कि एससी और एसटी लम्बे समय तक रोजगार पाने वाले नहीं रहने चाहिए बल्कि वे रोजगार देने वाले होने चाहिए। हमें उनकी इच्छा को पूरा करना चाहिए। एक मंत्री के रूप में इसके लिए मैं प्रतिबद्ध हूं।’’ हालांकि मामले में उपजे विवाद के बाद उन्होंने माफी मांग ली है। एएनआई के मुताबिक उन्होंने कहा है, ‘मैंने गलती से विजय माल्या का नाम लिया। मुझे किसी और का नाम लेना चाहिए था। मुझे उसका नाम नहीं लेना चाहिए था, यह मेरी गलती थी।’

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज विशेष पीएमएलए अदालत का दरवाजा खटखटाकर हीरा व्यावसायी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ करार देने की मांग की। एजेंसी ने दो अरब डॉलर के पीएनबी धोखाधड़ी मामले में उनकी 3500 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त करने की मांग की है। अधिकारियों ने बताया कि दोनों के खिलाफ हाल में लागू किए गए भगोड़ा आर्थिक अपराध अध्यादेश के तहत दो अलग – अलग आवेदन अदालत में दिए गए हैं। यह अदालत धनशोधन निरोधक कानून के तहत मामलों की सुनवाई करती है।

एजेंसी ने इस महीने की शुरुआत में व्यावसायी विजय माल्या के खिलाफ नौ हजार करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में इसी तरह का आवेदन दिया था और अदालत ने नये अधिनियम के तहत उसे 27 अगस्त के लिए समन जारी किए थे। नये आवेदन में नीरव मोदी और चोकसी तथा उनकी कंपनियों की करीब 3500 करोड़ रुपये की संपत्ति को तुरंत जब्त करने की मांग की गई। एजेंसी उनकी चल – अचल संपति को जब्त करना चाहती है जिसमें ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात की संपत्ति भी शामिल है। एजेंसी की तरफ से दायर दो पीएमएलए आरोप पत्रों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

एजेंसी ने अपने आवेदन में कहा कि जांच से पता चलता है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने कुछ बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से ठगी का अपराध किया है और इससे बैंकों को काफी नुकसान हुआ है। नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी के खिलाफ ईडी और सीबीआई जांच कर रही है। दोनों ने पंजाब नेशनल बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंक को 13400 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया था जिसका पता चलने के बाद उनके खिलाफ जांच चल रही है।

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