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भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को आधिकारिक रूप से “शहीद” मान सकती है मोदी सरकार

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब जल्द ही क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को आधिकारिक तौर पर शहीद का दर्जा दे सकती है।

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब जल्द ही क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को आधिकारिक तौर पर शहीद का दर्जा दे सकती है।भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु तीनों को ही अभी तक दस्‍तावेजों में शहीद का दर्जा नहीं मिला और इसकी तैयारी में केंद्र सरकार जुट गई है। गृह मंत्रालय ने इस चीज को लेकर काम शुरू कर दिया है। न्‍यूज18 डॉटकॉम की खबर के मुताबिक गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि भगत सिंह को शहीद का टाइटल देने के मामले को लेकर 2013 में एक आरटीआई डाली गई थी। खबर के मुताबिक अहीर ने बताया कि अंग्रेजों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को क्रांतिकारी आतंकी कहा था, लेकिनआजाद भारत में हम ऐसा नहीं कह सकते। इसलिए अब गृह मंत्रालय सभी जगहों पर रिकार्ड में सुधार करवाने का काम करेगा।

वहीं भगत सिंह के प्रपौत्र और शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के प्रमुख यादवेंद्र सिंह संधू ने भी इस मामले को लेकर गृह राज्‍य मंत्री से मुलाकात की। उन्होंने उम्‍मीद जताई है कि मोदी सरकार इस मांग को पूरा करेगी। बता दें भगत सिंह को शहीद घोषित करने को लेकर डाली गई आरटीआई पर मनमोहन सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्‍य सभा सांसद केसी त्‍यागी ने 2013 में सदन में यह मुद्दा उठाया था। गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार भगत सिंह को लेकर काफी ऐक्टिव हुई है। बीते महीने भगत सिंह की उस पिस्तौल की प्रदर्शनी लगाई गई थी जिससे उन्होंने ब्रटिश एएसपी ऑफिसर जॉन सैंडर्स को 17 दिसंबर 1928 को गोली मारी थी। लगभग 90 साल बाद भगत सिंह की पिस्तौल को स्टोर रूम से निकालकर इंदौर स्थित सीएसडब्ल्यूटी सीमा सुरक्षा बल के रेओटी फायरिंग रेंज में डिसप्ले पर लगाया गया था।

वहीं बीते रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने भी अपने रेडियो शो ‘मन की बात’ में भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान की गाथा को हम शब्दों में अलंकृत नहीं कर सकते। तीनों वीर आज भी हम सबकी प्रेरणा के स्त्रोत हैं। तीनों की बहादुरी ब्रिटिश सरकार को डराती थी इसलिए अंग्रेजों ने भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को तय दिन से एक दिन पहले ही फांसी दे थी।

 

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