केंद्र सरकार ने बुधवार को होटलों और रेस्टोरेंट के लिए एडवाइजरी जारी की। सरकार ने कहा कि वे खाने के बिल में LPG चार्ज या गैस सरचार्ज के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेना बंद करें। सरकार ने कहा कि इन खर्चों को मेनू में मौजूद चीज़ों की कीमतों में ही शामिल करें। ईंधन की मौजूदा समस्या के बीच इस तरह के शुल्क जोड़ने को सर्विस चार्ज पर मौजूदा गाइडलाइंस से बचने की कोशिश बताते हुए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने एक एडवाइजरी जारी की।

एडवाइजरी में क्या कहा गया?

CCPA के मुख्य आयुक्त निधि खरे द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया, “CCPA के संज्ञान में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पर दर्ज शिकायतों, अन्य शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट के ज़रिए यह बात आई है कि रेस्टोरेंट और होटल बिल में डिफ़ॉल्ट रूप से ‘LPG चार्ज’, ‘गैस सरचार्ज’, ‘ईंधन लागत वसूली’, ‘गैस संकट शुल्क’ या इसी तरह के अन्य नामों से अतिरिक्त शुल्क ले रहे हैं। इसके अलावा यह शुल्क मेनू में बताई गई खाने की चीज़ों की कुल कीमत और लागू टैक्स के अलावा लिया जा रहा है।”

CCPA ने कहा, “कोई भी होटल या रेस्टोरेंट बिल में डिफ़ॉल्ट रूप से या अपने आप ‘LPG चार्ज’, ‘गैस सरचार्ज’, ‘ईंधन लागत वसूली’, ‘गैस संकट शुल्क’ या इसी तरह का कोई भी शुल्क नहीं लेगा। होटलों और रेस्टोरेंट को यह सुनिश्चित करना होगा कि मेनू में दिखाई गई कीमत ही अंतिम कीमत हो, जिसमें केवल लागू टैक्स शामिल न हों।”

एडवाइज़री में आगे कहा गया है, “यह फिर से दोहराया जाता है कि इनपुट लागतें (जिनमें ईंधन, LPG, बिजली या अन्य परिचालन खर्च शामिल हैं) व्यवसाय चलाने की लागत का ही हिस्सा हैं, और इन्हें मेनू में मौजूद चीज़ों की कीमतों में उचित रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उपभोक्ताओं पर अलग से और अनिवार्य रूप से शुल्क लगाकर इस तरह की लागतों की वसूली करना, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2 (47) के तहत एक अनुचित व्यापारिक तरीका माना जाएगा।”

नियम का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

CCPA की एडवाइज़री में कहा गया है, “इसके अलावा अलग-अलग नामों से इस तरह के शुल्क लगाना, सर्विस चार्ज पर मौजूदा गाइडलाइंस से बचने की एक कोशिश है। ये गाइडलाइंस साफ़ तौर पर किसी भी अतिरिक्त शुल्क को डिफ़ॉल्ट रूप से या किसी अन्य नाम से वसूलने पर रोक लगाती हैं। इस तरह के चार्ज, चाहे उन्हें कोई भी नाम दिया जाए, असल में सर्विस चार्ज या खाने-पीने की चीज़ों की कीमत के ऊपर ली जाने वाली कोई और एक्स्ट्रा फीस ही होते हैं। इसलिए, ‘LPG चार्ज’, ‘गैस सरचार्ज’, ‘फ्यूल कॉस्ट रिकवरी’, ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ या इसी तरह के दूसरे चार्ज अपने-आप लगाना, 04.07.2022 की CCPA गाइडलाइंस (सर्विस चार्ज पर) का उल्लंघन माना जाएगा। इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही पर, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।”

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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच LPG और ईंधन की कमी को लेकर लोगों के मन में चिंता है। सरकार ने बताया कि देश में पेट्रोल और डीज़ल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पढ़ें पूरी खबर