ताज़ा खबर
 

पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा- “सबसे बड़े रोजगार संकट से गुजर रहा देश, सच छिपाने में लगे हैं पीएम”

यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री के दावों को विभिन्न संस्थाओं के आंकड़ों से पस्त करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया है कि मौजूदा परिस्थिति में जितने भी डाटा हैं उन्हें प्रधानमंत्री झुठला रहे हैं। वर्ल्ड बैंक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2017 में भारत के रोजगार दर में 51.9% तक की गिरावट आई।

वाजयेपी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार को रोजगार के मोर्चे पर फेल बताया. (फोटो सोर्स: पीटीआई)

एनडीए की वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे बीजेपी के पूर्व वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने केंद्र की मोदी सरकार पर रोजगार संकट से मुंह मोड़ने और इसके आंकड़ों में फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। इकोनॉमिक्स टाइम्स में लिखे एक लेख में पूर्व वित्त मंत्री ने बेरोजगारी के संबंध में पीएम मोदी पर सच छिपाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि देश में नए रोजगार की कमी है और चपरासी की नौकरी के लिए भारी संख्या में इंजीनियर, सीएम तथा पोस्ट ग्रेजुएट युवा आवेदन कर रहे हैं। लेकिन, प्रधानमंत्री इस सच को स्वीकर नहीं कर रहे हैं और देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं।

देश में रोजगार संकट का हवाला देते हुए यशवंत सिन्हा ने लिखा है, “पिछले कुछ सालों में 25 लाख भारतीय युवाओं पश्चिम बंगाल में ग्रुप डी के 6 हजार पदों के लिए प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लिया। वहीं, राजस्थान में चपरासी के 18 पदों के लिए 12,453 लोगों ने आवेदन किया। रेलवे के विभिन्न 90,000 पदों पर नियुक्ति के लिए 2.8 करोड़ लोगों ने आवेदन भेजा। इनमें जॉब की ख्वाहिश पाले इंजीनियर, सीए, वकील और तमाम पोस्ट ग्रेजुएट लोग शामिल थे।” सिन्हा ने इस हालात को बयां करते हुए पीएम मोदी को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी संकटग्रस्त परिस्थिति को पीएम मोदी देखना नहीं चाहते। उल्टा वह देश में नौकरियों का सही आंकड़ा नहीं पेश करने की दलील देते हैं। पीएम के एक संबोधन का यशवंत सिन्हा ने जिक्र किया जिसमें उन्होंने जुलाई,2018 में कहा था, “मुद्दा ये नहीं कि देश में नौकरियों की कमी है, बल्कि यह है कि नौकरियों के संदर्भ में डाटा की कमी है।”

अपने लेख में यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री के दावों को विभिन्न संस्थाओं के आंकड़ों से पस्त करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया है कि मौजूदा परिस्थिति में जितने भी डाटा हैं उन्हें प्रधानमंत्री झुठला रहे हैं। वर्ल्ड बैंक और सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2017 में भारत के रोजगार दर में 51.9% तक की गिरावट आई। मगर मोदी इसे स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने खुद की सरकार में श्रम मंत्रालय द्वारा 2017-18 का क्वाटर्ली इंप्लॉयमेंट सर्वे (QES) झुठला दिया। बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि इस आंकड़े में स्वरोजगार से जुड़े लोग शामिल नहीं हैं।

यशवंत सिन्हा ने पीएम मोदी पर उनके स्वरोजगार के संबंध में पकौड़े बेचने, चाय की दुकान लगाने और रिक्शा चलाने पर भी गंभीर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ऐसे स्वरोजगार की वह आलोचना नहीं करते। लेकिन, ये किसी भी सूरत में दूसरे लोगों के लिए प्रेरणादायक नहीं हो सकते।

सिन्हा ने मोदी सरकार पर आरोप लगाए कि वह रोजगार के संबंध में देश के सामने सही तस्वीर नहीं पेश कर रही है। वह खुद के ही श्रम मंत्रालय के QES का गला घोटने की तैयारी में है। सिन्हा ने कहा है, “कर्मचारी भविष्य निधि सगंठन (ईपीएफओ) के संदर्भ में आंकड़ा बेहद ही दुखद है। इसमें बताया गया है कि 2017-18 में 70 लाख नई नौकिरयां दी गई हैं। जबकि, ईपीएफओ का आंकलन करके सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (सीएसओ) का कहना है कि नई नौकरियां 41 लाख दी गईं। लेबर ब्यूरो का सर्वे बताता है कि सिर्फ 2 करोड़ नई नौकरियां दी गईं हैं।”

सिन्हा ने अपने लेख में सिर्फ पीएम मोदी को ही आलोचना के घेरे में रखा है। उन्होंने मोदी सरकार को रोजगार के मोर्चे पर पाप करार दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में नई नौकरियों की कमी नहीं बल्कि मौजूदा रोजगार को भी खत्म करने का काम किया गया और नोटबंदी लागू की गई। उन्होंने बताया कि आंकड़ों की बाजीगरी करके वह पुरानी सरकारों के जीडीपी आंकड़े कम रहे हैं ताकि बता सकें कि सबसे ज्यादा विकास दर उन्हीं के कार्यकाल में रहा है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App