जीडीपी बढ़ाने के लिए मोदी सरकार का 60 पॉइंट एक्शन प्लान, इन अधिकारियों की होंगी धड़ाधड़ नियुक्तियां

बैठक में नीति आयोग से पांच सालों में गरीबी मिटाने का लक्ष्य रखने के लिए कहा गया। अलग-अलग मंत्रालयों की योजनाओं को आधार से जोड़कर एक साथ लाने की बात भी कही गई है। अनीषा दत्ता की यह रिपोर्ट पढ़िए।

PM Modi Meeting, BJP
केंद्र सरकार ने 60 बिंदुओं वाला एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसमें जीडीपी को गति देना शामिल है(फोटो सोर्स: PTI)।

अनीषा दत्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी विभागों और मंत्रालयों के सचिवों के साथ 18 सितंबर को एक बैठक की थी। जिसमें एक व्यापक 60-सूत्रीय कार्य योजना तैयार की गई। इस कार्य योजना में तीन मुख्य बातों पर जोर दिया गया है। जिसमें शासन के लिए आईटी का लाभ उठाना, देश में व्यावसायिक माहौल में सुधार करना और सिविल सेवाओं को बेहतर बनाना, शामिल है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इन 60 बिंदुओं में कोरोना काल के बाद सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने के लिए जरूरी फैसले लेने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मानचित्रण का उपयोग करने, स्टार्ट-अप के लिए एक देशव्यापी परामर्श मंच बनाने को कार्य योजना में शामिल किया है।

इसको प्रभावी बनाने के लिए मीटिंग में मुख्य सूचना अधिकारियों (सीआईओ) और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारियों (सीटीओ) की नियुक्तियों की सिफारिश की गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस स्तर पर अधिकारियों की नियुक्तियों में तेजी दिखेगी।

योजना के अनुसार, सरकारी संगठनों को जीआईएस-आधारित योजना के लिए सेटेलाइट आधारित जानकारी का लाभ उठाने की आवश्यकता है। सितंबर महीने में हुई इस बैठक में नीति आयोग से पांच सालों में गरीबी मिटाने का लक्ष्य रखने के लिए कहा गया है। अलग-अलग मंत्रालयों की योजनाओं को आधार के जरिए एक साथ लाने की बात भी इसमें कही गई है।

इस एक्शन प्लान को लेकर कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने 20 सितंबर को सचिवों को अलग-अलग पत्र जारी कर कहा कि, इन बिंदुओं पर तुरंत प्रभाव से कदम उठाया जाये और एक निश्चित समय में पूरा किया जाय। बैठक में तय किए गए 60 बिंदुओं में अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को लेकर काम तय किए गए हैं।

उदाहरण के तौर पर देखें तो देश में व्यापार को अधिक बढ़ावा देने के लिए इन एक्शन पॉइंट्स में कुछ अनुमतियों को खत्म करने की बात कही गई है। इसके अलावा 10 सेक्टर्स में कारोबार शुरू करने में आने वाली लागत में कमी लाकर इसे वियतनाम और इंडोनेशिया के बराबर लाना, सभी सरकारी सेवाओं को एक ही जगह पर लाना, भूमि अधिग्रहण को समय पर करना और जंगलों की मंजूरी के लिए राज्यों को प्रोत्साहन देना शामिल है।

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