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कोरोना संकट के दौरान आलोचनाओं को दबाने में लगे मोदी, लैंसेट के संपादकीय में तीखा प्रहार

मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की प्राथमिकता कोविड महामारी को नियंत्रित करने की कोशिश करने की बजाय ट्विटर पर आलोचना को हटाना है।

Translated By subodh gargya नई दिल्ली | May 8, 2021 7:23 PM
कोरोना के चलते बने हालात को लेकर मोदी सरकार की जमकर आलोचना हो रही है। (एक्सप्रेस फोटो)।

मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की प्राथमिकता कोविड महामारी को नियंत्रित करने की कोशिश करने की बजाय ट्विटर पर आलोचना को हटाना है। पत्रिका में कहा गया है कि मोदी सरकार संकट के दौरान आलोचना और खुली बहस पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।

द इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के संपादकीय के हवाले से अनुमान लगाया गया है कि भारत में इस साल 1 अगस्त तक COVID-19 से 10 लाख लोगों की मौत हो जाएगी। संपादकीय में कहा गया है, “अगर ऐसा हुआ तो मोदी सरकार इस राष्ट्रीय तबाही के लिए जिम्मेदार होगी।” क्योंकि सुपरस्प्रेडर के जोखिमों के बारे में चेतावनी के बावजूद, सरकार ने धार्मिक उत्सवों को अनुमति दी, विशाल राजनीतिक रैलियों कीं।

स्वास्थ्य ढांचे की चरमराई हालत पर रोशनी डालते हुए, संपादकीय में संकट से निपटने में सरकार की आलोचना की गई है। संपादकीय में कहा गया है, “… अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं, स्वास्थ्यकर्मी थक गए हैं और संक्रमित हो रहे हैं। सोशल मीडिया हताश लोगों (डॉक्टरों और जनता) से भरा हुआ है, जो मेडिकल ऑक्सीजन, अस्पताल के बिस्तर और अन्य ज़रूरतों की मांग कर रहे हैं।”’

संपादकीय में लिखा गया है, ” मार्च की शुरुआत में COVID-19 के मामलों की दूसरी लहर शुरू होने से पहले, भारतीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने घोषणा की कि भारत से कोरोना महामारी खत्म होने को है। सरकार की धारणा थी कि भारत ने COVID -19 को हराया है। लेकिन सरकार को बार बार एक दूसरी लहर के खतरों की चेतावनी दी गई थी और नए म्यूटेंट के बारे में पता था।”

संपादकीय में यह भी कहा गया है कि भारत ने COVID-19 को नियंत्रित करने में अपनी शुरुआती सफलताओं को खो दिया है। भारत का टीकाकरण कार्यक्रम भी तीखी आलोचना के घेरे में आया है। संपादकीय में कहा गया है कि सरकार ने राज्यों के साथ नीति में बदलाव पर चर्चा किए बिना अचानक बदलाव किया।

संपादकीय में कहा गया है कि भारत में कोरोना संकट समान रूप से नहीं है उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अचानक इतने मामले सामने आए हैं। हालांकि केरल और ओडिशा, की स्थिति बेहतर है। पत्रिका ने कहा है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि सरकार अपनी गलतियों के लिए जिम्मेदार ले, जिम्मेदार नेतृत्व दे और पारदर्शिता रखे।

संपादकीय ने आगे दो-तरफा रणनीति का सुझाव दिया है – पहला, टीकाकरण अभियान को तर्कसंगत रूप से लागू किया जाना चाहिए और सभी तेज गति से लागू किया जाना। टीके की आपूर्ति पर जोर देने के लिए कहा गया है। संपादकीय में कहा गया है कि सरकार को स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ काम करना चाहिए। इसके अलावा संपादकीय में कहा गया है कि सरकार को समयबद्ध तरीके से सटीक आंकड़े प्रकाशित करने चाहिए, और जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि क्या हो रहा है और महामारी के चक्र को तोड़ने के लिए क्या आवश्यक है।

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