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नेताओं के विवादित बोल पर ईसी ने की कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लगता है चुनाव आयोग जाग गया

ईसी द्वारा एक्शन लेने पर सहमति जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लगता है चुनाव आयोग को अपनी शक्तियां याद आ गईं। ऐसे में अब कोर्ट को किसी भी तरह के अंतरिम आदेश को देने की जरूरत नहीं।

सुप्रीम कोर्ट नेताओं के विवादित बोल पर ईसी की कार्रवाई से सहमत।

Lok Sabha election 2019: चुनाव आयोग (ईसी) ने विवादित बयान देने के मामले में भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी, सपा के कद्दावर नेता आजम खान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा सुप्रीमो मायावती के चुनाव प्रचार पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया। चुनाव आचार संहिता के लगातार उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ईसी एक्शन में आया और इन नेताओं के चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया।

निर्वाचन आयोग की कार्रवाई का संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि निर्वाचन आयोग ‘‘जाग गया’’ है और उसने विभिन्न नेताओं को अलग-अलग समय तक चुनाव प्रचार करने से रोक दिया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि अभी फिलहाल इस मामले में आगे किसी और आदेश की जरुरत नहीं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने बसपा सुप्रीमो मायावती के चुनाव प्रचार करने पर निर्वाचन आयोग द्वारा लगाए 48 घंटे के प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर भी विचार करने से इनकार कर दिया।

बता दें कि चुनाव आयोग ने सबसे पहले सीएम योगी और मायावती पर कड़ा एक्शन लिया। ईसी ने सीएम योगी के अली-बजरंगबली और मायावती के मुस्लिमों पर दिए बयान को चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए प्रतिबंध लगाया। ईसी ने सीएम योगी और मायवती पर अलग-अलग अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया। हालांकि, इस रोक के बाद योगी मंगलवार को लखनऊ के मशहूर हनुमान सेतु मंदिर पहुंचे। ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच योगी ने यहां पूजा-अर्चना की।

वहीं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान पर भी अलग-अलग अवधि के लिए प्रतिबंध लगा है। मेनका गांधी पर यह प्रतिबंध इसिलए लगा क्योंकि उन्होंने एक चुनावी रैली के दौरान कहा था कि ‘मैं जीत रही हूं। लोगों की मदद, प्यार से मैं जीत रही हूं। पर यह अगर मुस्लिमों के बगैर होगा, तब मुझे अच्छा नहीं लगेगा। दिल खट्टा हो जाता है। मुसलमान काम के लिए आता है, तब मैं सोचती हूं कि रहने ही दो। ये नहीं कि हम सब महात्मा गांधी की छठी औलाद हैं।’

जबकि रामपुर में चुनावी सभा के दौरान आजम खान ने आपत्तिजनक बयान दिया था। कहा था, ‘जिसे हम अंगुली पकड़कर रामपुर लाए। आपने 10 साल जिससे प्रतिनिधित्व कराया, उनकी असलियत समझने में आपको 17 बरस लगे। मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का ‘अंडरवियर खाकी’ रंग का है।’ हालांकि, उन्होंने उस दौरान कहीं भी भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा का नाम नहीं लिया था, पर माना जा रहा है कि आजम का इशारा भाजपा उम्मीदवार की तरफ ही था।

नेताओं द्वारा आय दिन इस तरह के विवादित बयान और अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया जिसके बाद चुनाव आयोग हरकत में आया।

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