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मॉब लिचिंग: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ रेंज में गो-तस्‍करी में 54 पकड़े गए, गो-रक्षा में एक भी नहीं

सुप्रीम कोर्ट के गो-रक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा की जाने वाली हत्याओं के मामलों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देशों के बावजूद उत्तर प्रदेश में पुलिस ने मेरठ रेंज में गो-तस्‍करी मामलों में तो कई लोगों को गिरफ्तारी की है लेकिन गो-रक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा के मामलों में एक भी गिरफ्तारी नहीं की है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के आदेश दिए थे। (Express photo by Gajendra Yadav)

सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को गो-रक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा की जाने वाली हत्याओं पर कड़ी कार्रवाई करने के आदेश राज्यों को दिए थे। उत्तर प्रदेश पुलिस मेरठ रेंज में गो-तस्‍करी के मामलों में तो 54 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन गो-रक्षा में एक भी गिरफ्तारी नहीं की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के आदेश दिए थे। नोडल अधिकारी स्पेशल टास्क फोर्स को लीड करता और बीते 5 सालों के भीड़ द्वारा हिंसा के मामलों पर इंटेलिजेंस रिपोर्ट पेश होती ताकि उन जिलों की पहचान हो सके जहां यह घटनाएं सबसे अधिक होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को भी यह निर्देश दिए थे कि वह सुनिश्चित करे कि सोशल मीडिया के जरिए हिंसा न भड़काई जा सके। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मेरठ रेंज के एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर हमने एडशिनल एसपी रैंक के अधिकारी नोडल अधिकारी नियुक्त किया। पुलिस ने अच्छा काम किया है। गो-तस्‍करी के 40 मामले में कार्रवाई की गई है जिनमें 54 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।” एडीजी ने यह भी बताया कि 9 केस नेशनल सिक्योरिटी ऐक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि गो-रक्षा के मामलों में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई क्योंकि गोकशी और गो-तस्‍करी की घटनाओं पर समय रहते पुलिस ने काबू पा लिया।

बुलंदशहर के स्याना में हुई हिंसा को लेकर कुमार ने कहा, “इस घटना पर काबू पाने में हमें 3 घंटे का समय लगा। इज्तेमा के कारण भारी पुलिस बल वहां पर तैनात किया गया था।” क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी जो स्याना में भीड़ को काबू करने पहुंचे थे उन्होंने बताया कि ऐसी घटना का अंदाजा लगाना मुश्किल था क्योंकि इस इलाके से ऐसा कोई मामला कभी सामने ही नहीं आया है। हालांकि क्राइम ब्रांच अधिकारी ने यह भी कहा कि गो-रक्षा के मामले छिटपुट थे और उन्हें डॉक्यूमेंट नहीं किया गया क्योंकि पुलिस तुरंत स्थिति पर काबू पाने पहुंच जाती थी और हर बार गोकशी के मामलों में समय रहते एफआईआर दर्ज की गई।

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