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घोड़े पर विधानसभा पहुंचीं 30 साल की विधायक अंबा प्रसाद, कहा- रिटायर्ड आर्मी अफसर ने दिल्ली से भिजवाया तोहफ़ा

अंबा ने 2019 में जब चुनाव जीता था, तब उनकी उम्र महज 28 साल की थी। वह बरकागांव के विधायक रहे निर्मला देवी और योगेंद्र साव की बेटी हैं। उनके माता-पिता भूमि विस्थापन से जुड़े मामले में नामजद हैं। इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी।

mla amba prasadकांग्रेस की विधायक सोमवार को घोड़े पर सवार होकर असेंबली पहुंचीं (फोटोः ट्विटर@AmbaPrasadINC)

झारखंड की सबसे युवा विधायक अंबा प्रसाद सोमवार को असेंबली पहुंची तो एक अलग ही नजारा देखने को मिला। परिसर में मोजूद लोगों में उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ लग गई। दरअसल, 30 साल की एमएलए घोड़े पर सवार होकर असेंबली पहुंची थीं। उन्हें यह घोड़ा एक रिटायर्ड आर्मी अफसर ने दिल्ली से तोहफ़े में भिजवाया है। पोलो की शौकीन रहीं अंबा का कहना है कि उन्हें घुड़सवारी बहुत भाती है। वह असेंबली तो नहीं लेकिन रोज सुबह इस घोडे़ पर सवार होकर सैर के लिए जरूर जाएंगी।

अंबा ने बताया कि उन्हें महिला दिवस पर यह घोड़ा कर्नल रवि राठौड़ से मिला है। इसे दिल्ली से एनीमल एंबुलेंस के जरिए रांची तक लाया गया। अर्जुन अवार्डी कर्नल राठौड़ पोलो के बेहतरीन खिलाड़ी हैं। वह आर्मी की 61 कैवेलरी रेजीमेंट के कमांडेंट थे। थोड़ा अर्सा पहले इंडियन पोलो एसोसिएशन के सक्रेट्री पद से रिटायर हुए हैं। उन्होंने भारतीय टीम की तरफ से पोलो की वर्ल्ड चैंपियनशिप में पांच बार हिस्सा लिया था। भारत ने धमाकेदार तरीके से 2011 और 17 की वर्ल्ड चैंपियनशिप अपने नाम की थी।

एमएलए के मुताबिक वह इस घोड़े का खास ख्याल रखेंगी। उनकी कोशिश होगी कि घुड़सवारी के लिए झारखंड में एक ढांचा तैयार किया जा सके। वह चाहती हैं कि लोगों घुड़सवारी को अपनी हॉबी बनाएं। उनका कहना है कि इंडियन पोलो एसोसिएशन ने जो विश्वास उन पर दिखाया है वह उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगी। अंबा का कहना है कि उन्हें उस वक्त हैरत भी हुई जब यह पता चला कि दिल्ली से कर्नल राठौड़ ने उनके लिए घोड़ा भेजा है। इसकी ब्रीड रॉयल है। उनके लिए गर्व की बात है कि महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह खुद इसी ब्रीड के घोड़ों पर सवारी करते थे।

अंबा ने 2019 में जब चुनाव जीता था, तब उनकी उम्र महज 28 साल की थी। वह बरकागांव के विधायक रहे निर्मला देवी और योगेंद्र साव की बेटी हैं। उनके माता-पिता को बीजेपी सरकार के समय में भूमि विस्थापन से जुड़े एक मामले में नामजद किया गया था। आरोप है कि एनटीपीसी प्रोजेक्ट के लिए बरकागांव की जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा था। ग्रामीणों ने इस विरोध किया तो पुलिस ने फायरिंग कर दी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। अंबा उस समय दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं। खबर लगते ही वह रांची लौट आईं। उन्होंने कानून की पढ़ाई की, जिससे अपने माता-पिता को बरी करा सकें।

अंबा ने लॉ के साथ एमबीए की डिग्री भी हासिल की है। 28 साल की उम्र में एमएलए बनने के बाद वह यूथ आइकॉन बन गई हैं। उनके माता-पिता का केस हजारीबाग कोर्ट में चल रहा है। अंबा उनको न्याय दिलाने के लिए भरसक कोशिश कर रही हैं। अंबा का कहना है कि कर्नल राठौड़ से उनकी मुलाकात दिल्ली प्रवास के दौरान ही हुई थी। ध्यान रहे कि अंबा के पिता योगेंद्र साव एक समय झारखंड के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।

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