दक्षिण के दो प्रमुख गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों एम.के. स्टालिन और ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया। दोनों मुख्यमंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर उनके राज्यों को नुकसान हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
स्टालिन और रेड्डी की तीखी टिप्पणियां संसद के बजट सत्र के दो दिन पहले आई हैं।
संसद की इस सप्ताह होने वाली बैठक के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन पेश किए जाएंगे, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है। इसे 2029 में लागू किया जाएगा।
सीएम स्टालिन ने एक वीडियो संदेश में चेतावनी दी कि अगर तमिलनाडु को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया या परिसीमन में उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति में असमान रूप से बढ़ोतरी की गई, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन होंगे जिससे पूरा राज्य ठप हो जाएगा और पूरी ताकत से विरोध प्रदर्शन होंगे।
एकतरफा कार्रवाई करने की कोशिश
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर गोपनीयता बरतने के आरोप को दोहराया और कहा कि डीएमके ही नहीं बल्कि किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी राज्य से परामर्श किए बिना केंद्र सरकार एकतरफा कार्रवाई करने का प्रयास कर रही है।
स्टालिन ने कहा कि जब प्रक्रिया में गोपनीयता बरती जाती है, तो इससे गंभीर खतरे की आशंका और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के लोग गहरी चिंता में डूबे हुए हैं।
हर परिवार सड़कों पर उतरेगा
स्टालिन ने कहा, ”तमिलनाडु पूरी ताकत से अपना विरोध दर्ज कराएगा। हर परिवार सड़कों पर उतरेगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में मेरे नेतृत्व में, हम एक व्यापक आंदोलन खड़ा करेंगे।”
स्टालिन ने 16 अप्रैल को संसद के सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों के बीच इसे जबरन बुलाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया, ”इस सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन को जबरदस्ती पारित कराने का इरादा रखती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों पर अपना फैसला थोपना चाहती है।
रेड्डी बोले- एससी-एसटी के साथ होगा अन्याय
इसके अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में परिसीमन को लेकर कहा कि यदि पर्याप्त संख्या में सीटें नहीं बढ़ाई जाती, तो दक्षिणी राज्यों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को अन्याय का सामना करना पड़ेगा।
रेड्डी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने परिसीमन का मुद्दा इसलिए उठाया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी दक्षिणी राज्यों की कीमत पर उत्तर प्रदेश या गुजरात में सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। रेड्डी ने कहा कि यदि लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाती है, तो केरल में लोकसभा की सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी और उत्तर प्रदेश में 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
रेड्डी ने सवाल किया, ”यदि किसी उत्तरी राज्य में 30 सीट बढ़ जाती हैं, तो वहां दलितों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण बढ़ सकता है। मैं इससे इनकार नहीं करता। लेकिन क्या दक्षिणी राज्यों में सीट कम होने से दलितों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं को नुकसान नहीं होगा?”
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करने के लिए प्रस्तावित विधेयक पर कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है और उनकी सरकार विधानसभा में महिलाओं के कोटे पर कानून पारित करने के लिए तैयार होगी।
अब लोकसभा में होंगी 850 सीटें
केंद्र सरकार ने लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का उद्देश्य लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण कानून को लागू करना और साथ ही परिसीमन का नया चरण शुरू करना है। इससे संबंधित विधेयक का ड्राफ्ट सांसदों के साथ साझा किया गया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
