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MJ Akbar Resigns: एमजे अकबर को था निर्देश- सीनियर मिनिस्‍टर को हर कदम की दें जानकारी

MJ Akbar Resigns Latest News: मंत्री के करीबी सूत्रों ने बताया कि आरोप लगने से अकबर बुरी तरह व्यथित हो चुके थे। लेकिन उन्होंने त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि वह विदेश में थे। पद के प्रोटोकॉल के मुताबिक वह वहां पर ऐसा नहीं कर सकते थे। लेकिन उनसे एक वरिष्ठ मंत्री से बात करने के लिए कहा गया था कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्या करने वाले हैं?

विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर पर दो दर्जन से ज्‍यादा महिलाओं ने आरोप लगाए हैं। (Photo : PTI)

सरकार ने पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर को निर्देश दिया था कि वह इस संकट से कैसे निपटने वाले हैं? वह इसकी जानकारी अपने ​वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को दें। बता दें कि अकबर के ऊपर 20 महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि अकबर ने ये उत्पीड़न तब किया था जब वह कई मीडिया संगठनों में प्रमुख के पद पर काम कर रहे थे।

इकानॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री के करीबी सूत्रों ने बताया कि आरोप लगने से अकबर बुरी तरह व्यथित हो चुके थे। लेकिन उन्होंने त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि वह विदेश में थे। पद के प्रोटोकॉल के मुताबिक वह वहां पर ऐसा नहीं कर सकते थे। लेकिन उनसे एक वरिष्ठ मंत्री से बात करने के लिए कहा गया था कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्या करने वाले हैं?

इकानॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ​अकबर के करीबी ने बताया कि पहले तैयारी ये भी थी कि अकबर अपना दौरा छोड़कर देश लौट आएंगे लेकिन वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री से बात होने के बाद उन्होंने ये विचार छोड़ दिया। सरकार के वरिष्ठ सदस्यों को लगा कि इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच अच्छा संदेश नहीं जाएगा अगर किसी विदेशी वादे का सम्मान नहीं किया जाए।

जबकि सरकार और भाजपा नेतृत्व ने ये पूरी तरह से अकबर और उनकी कानूनी टीम पर छोड़ दिया था कि वह पूरजोर तरीके से अपना बचाव करें और अपना पक्ष रखे। सरकार और पार्टी ने भी उनका पूरा समर्थन करने का फैसला किया। हालांकि मंत्री पर दबाव बढ़ता जा रहा था क्योंकि और ज्यादा आरोप उनके ऊपर लगने शुरू हो गए ​थे। अकबर के द्वारा उनके खिलाफ आरोप लगाने वाली पहली महिला प्रिया रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर करने के बाद ही अकबर के साथ एक समाचार पत्र में काम कर चुकी दो महिला पत्रकारों ने भी आरोप लगा दिए।

जैसे ही अकबर विदेश से भारत लौटे, अकबर ने अपनी कानूनी फर्म से विस्तृत चर्चा की कि वह अपनी तरफ से कैसा बयान जारी करें। ये भी तय किया गया कि अकबर एक इंटरव्यू में अपनी पूरी बात रखेंगे। ये महसूस किया गया था कि ये आरोपों का जवाब देने के लिए पर्याप्त होगा। लेकिन अकबर के बयान की टोन को धीमा कर दिया गया, जबकि अकबर चाहते थे कि ये बेहद जोरदार हो।

इकानॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी कानूनी टीम के सदस्य ने बताया कि हालांकि उन्होंने अपने बयान में अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों को गलत बताया। अकबर ने रमानी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को विकल्प माना क्योंकि उन्हें ये लगता था कि ये उनके खिलाफ बड़ी साजिश का हिस्सा है। कानूनी सूत्रों ने कहा अकबर अब उनके खिलाफ मीडिया में छापी जा रही खबरों के खिलाफ कानूनी विकल्प का सहारा ले सकते हैं ।

बीते दो दिनों में तुशिता पटेल और स्वाति गौतम ने अकबर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पटेल ने आरोप लगाया कि अकबर ने उन्हें किस किया और होटल के कमरे में सिर्फ अंडरवियर पहनकर उनका स्वागत किया। उनकी कानूनी टीम ने कहा कि ये उनके खिलाफ सामूहिक रूप से साजिश की जा रही है। कई महिला पत्रकारों ने रमानी के कानूनी खर्च के लिए पैसे इकट्ठा करना भी शुरू कर दिया है। कई पत्रकार संगठनों ने भी महिला पत्रकारों के पक्ष में अपना समर्थन बढ़ा दिया है। भारतीय महिला प्रेस कॉर्प्स, साउथ एशियन महिला इन मीडिया, प्रेस एसोसिएशन और प्रेस क्लब आॅफ इंडिया ने इस मामले में अकबर के खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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