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कभी बीजेपी की ही मदद से बने थे सीएम, आज बन गए हैं सबसे बड़ा खतरा

यूपी में 25 साल बाद फिर से सपा-बसपा मतभेदों को भुलाकर एकसाथ हुए हैं। इनका मकसद भाजपा को हराना है। उधर, बिहार में भी लालू यादव की पार्टी राजद ही बीजेपी के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

Author Updated: March 6, 2018 5:07 PM
Prime Minister Narendra Modi, BJP President Amit Shahप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह। (PTI File Photo)

कहते हैं राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। आज की तारीख में भारतीय जनता पार्टी का परचम देशभर में लहरा रहा है लेकिन 1990 के दशक में बीजेपी एक छोटे दल के रूप में ही थी और वो गैर कांग्रेसी विचारधारा वाली पार्टियों को सरकार बनाने में मदद किया करती थी। 1989 में केंद्र की वीपी सिंह सरकार भी बीजेपी के सहयोग से ही बनी थी। उसी साल उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की पहली बार सरकार बनी थी। उस वक्त मुलायम सिंह जनता दल के नेता थे। 425 सदस्यीय यूपी विधान सभा में जनता दल को 208 सीटें मिली थीं, तब 57 सीटों वाली बीजेपी ने बाहर से मुलायम सिंह की सरकार को समर्थन दिया था। तब 1989 से 1991 तक बीजेपी की बैसाखी के सहारे मुलायम सिंह यादव ने सरकार चलाई थी। हालांकि, बीजेपी द्वारा समर्थन वापस लेने की वजह से नवंबर 1990 में केंद्र की वीपी सिंह सरकार गिर गई थी, बावजूद इसके मुलायम सिंह की सरकार बनी रही। उन्होंने चंद्रशेखर की पार्टी जनता दल (समाजवादी) ज्वाइन कर लिया था। तब मुलायम सिंह की सरकार को कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया था। यह सरकार अप्रैल 1991 तक चली। इस दौरान मुलायम सिंह की सरकार मुस्लिम हितैषी साबित हुई। इससे उत्साहित मुलायम सिंह ने 1992 में अपनी समाजवादी पार्टी बना ली।

1989-90 में देश में मंडल लहर चल रही थी। पड़ोसी राज्य बिहार में भी लालू प्रसाद यादव पहली बार 1990 में मुख्यमंत्री बने। 324 सदस्यों वाली बिहार विधान सभा में लालू की पार्टी जनता दल को 1990 के चुनाव में कुल 122 सीटें मिली थीं जो बहुमत से कम थीं। तब केंद्र की तर्ज पर बिहार में भी बीजेपी ने अपने 39 विधायकों का समर्थन लालू यादव की सरकार को दिया था। इस तरह बीजेपी के सहयोग से ही लालू यादव भी सत्ता शिखर पर पहुंचे लेकिन लालकृष्ण आडवाणी ने जब राम रथ यात्रा निकाली तो उन्हें समस्तीपुर में लालू यादव ने 23 सितंबर 1990 को गिरफ्तार करवा दिया। इसके बाद बीजेपी ने केंद्र और बिहार सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। इधर, लालू यादव भी मुलायम सिंह यादव की तरह मुस्लिमों के रहनुमा बनकर उभरे। 1989 के भागलपुर दंगे के बाद लालू का यह मास्टरस्ट्रोक उन्हें निर्विवाद रूप से ओबीसी और मुस्लिमों का नेता बना दिया, जसके बल पर उन्होंने 15 साल तक शासन किया। कांग्रेस ने तब लालू की सरकार को बाहर से समर्थन दिया था।

बीजेपी के सहयोग से पहली बार सीएम बनने वालों में एक और नाम शामिल है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती यूपी की पहली दलित मुख्यमंत्री 5 जून 1995 को बनी थीं। 1993 के यूपी विधान सभा चुनाव में सपा और बसपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इसके बाद दोनों दलों में ढाई-ढाई साल सरकार चलाने का समझौता हुआ। मुलायम सिंह 4 दिसंबर 1993 को सीएम बने थे लेकिन इससे पहले ही मायावती द्वारा बीजेपी से दोस्ती की खबर पर 2 जून 1995 को सपा कार्यकर्ताओं ने गेस्टहाउस में मायावती को बंद कर दिया था। इस कांड के बाद मायावती ने बीजेपी के सहयोग से पहली बार 5 जून 1995 को यूपी में सरकार बनाई थी। हालांकि, उनकी पहली सरकार मात्र 137 दिन ही चल सकी।

मौजूदा दौर में यूपी में 25 साल बाद फिर से सपा-बसपा मतभेदों को भुलाकर एकसाथ हुए हैं। इनका मकसद भाजपा को हराना है। उधर, बिहार में भी लालू यादव की पार्टी राजद ही बीजेपी के लिए सबसे बड़ा खतरा है। अगर ये दल महागठबंधन बनाते हैं तो पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मिशन 2019 के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं क्योंकि ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण इनके पक्ष में हो सकता है।

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