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भारत ने किया कम दूरी की स्‍वदेशी मिसाइल का सफल परीक्षण, एक साथ कई निशाना लगाने में सक्षम

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सूत्रों ने बताया कि चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) में स्थित प्रक्षेपण परिसर-3 से एक ट्रक पर लगे कैनिस्टर के लांचर से सुबह करीब 11:30 बजे मिसाइल का परीक्षण-प्रक्षेपण किया गया।

Author Updated: July 3, 2017 7:32 PM
क्यूआरएसएएम मिसाइल। (फोटो सोर्स- पीटीआई)

त्वरित प्रतिक्रिया के साथ सतह से हवा में मार करने वाली स्वदेश निर्मित (क्यूआरएसएएम) कम दूरी की मिसाइल का आज ओडिशा के समुद्र तट के पास एक परीक्षण रेंज से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया जिसमें एक साथ कई लक्ष्यों पर निशाना साधने की क्षमता है। मिसाइल में 25 से 30 किलोमीटर की दूरी तक प्रहार करने की क्षमता है और इसे त्वरित प्रतिक्रिया वाली मिसाइल के रूप में तैयार किया गया है। इसमें हर मौसम में काम करने वाली शस्त्र प्रणाली है जिसमें लक्ष्य को पहचानने और उस पर निशाना साधने की क्षमता होती है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सूत्रों ने बताया कि चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) में स्थित प्रक्षेपण परिसर-3 से एक ट्रक पर लगे कैनिस्टर के लांचर से सुबह करीब 11:30 बजे मिसाइल का परीक्षण-प्रक्षेपण किया गया। उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक मिसाइल में लगी सभी प्रौद्योगिकियों और उप प्रणालियों ने अच्छा प्रदर्शन किया और मिशन की सभी जरूरतों को पूरा किया। सूत्रों के अनुसार सभी रडारों, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल प्रणाली, टेलीमेट्री प्रणालियों और अन्य स्टेशनों ने मिसाइल पर निगरानी रखी और सभी मानदंडों पर नजर रखी। परीक्षण के सभी उद्देश्यों की पूर्ति हुई।

रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने क्यूआरएसएएम के सफल परीक्षण पर डीआरडीओ को बधाई दी और कहा कि यह सतह से हवा में प्रहार करने वाली स्वदेशी मिसाइलों (एसएएम) के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। रक्षा अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) के सचिव डॉ एस क्रिस्टोफर ने सफल परीक्षण पर सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी। रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला के निदेशक एमएसआर प्रसाद, अनुसंधान केंद्र इमारत बीवीएचएस के निदेशक एन मूर्ति और आईटीआर के निदेशक डॉ बी के दास ने प्रक्षेपण अभियान पर नजर रखी।

परीक्षण के दौरान रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ जी सतीश रेड्डी उपस्थित थे। हवा में मौजूद लक्ष्य को निशाना बनाकर दागी गई इस अत्याधुनिक मिसाइल का यह दूसरा विकास परीक्षण था। डीआरडीओ और अन्य संस्थानों ने यह मिसाइल विकसित की है। इसका पहला परीक्षण चार जून, 2017 को इसी प्रक्षेपण स्थल से किया गया था।

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