पूर्व शिक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि नीट पेपर लीक मामले पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने जेन-जी क गुमराह करने की कोशिश की। इसकी वजह से इस्तीफा देना पड़ा। इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधान ने कहा कि मंत्री पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं था और उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने का प्रस्ताव रखा था।
धर्मेंद्र प्रधान ने ये टिप्पणियां भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कीं। प्रधान ने कहा, “जेन-जी हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। उस समय मुझे कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं थी। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। पिछले 10 सालों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनके सपने हैं और वे भारत को ‘ विश्व गुरु ‘ बनाएंगे। यह पद मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं था।”
प्रधान ने नवीन पटनायक पर साधा निशाना
रायराखोल में एक अन्य बैठक में प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे बीजेडी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन और उन्हें वापस जाने के लिए कहने वाले नारों से विचलित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक किसान का बेटा हूं। अगर आप मुझे वापस जाने के लिए कहेंगे भी, तो मैं वापस आ जाऊंगा।”
प्रधान ने कहा, “नवीन बाबू मुझे ओडिशा की जनता के लिए कलंक और बुरा व्यक्ति भी कहते हैं।” उन्होंने बीजेडी अध्यक्ष पर अपने खिलाफ युवाओं को विरोध प्रदर्शन में शामिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, “क्या मैंने कभी ऐसा कुछ किया है जिससे ओडिशा की जनता शर्मिंदा हो?” उनके इस सवाल पर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार आवाज में जवाब दिया, “नहीं।”
मैंने अपने काम से कभी जनता को शर्मिंदा नहीं किया- धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “हो सकता है कि मैं राज्य के लिए कोई गौरव न ला रहा हूं, लेकिन मैंने अपने काम से कभी जनता को शर्मिंदा नहीं किया है। मैं कभी ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे राज्य की प्रतिष्ठा धूमिल हो।” प्रधान ने कहा कि उन्हें 12 साल पहले भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की अधिष्ठात्री देवी समालेश्वरी के आशीर्वाद से केंद्रीय मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।
बता दें कि नीट पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
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धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने से पहले सरकार की ओर से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सामने उनके विभाग (पोर्टफोलियो) में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया था। सूत्रों के मुताबिक, सीजेपी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
