West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के लालबाग में रहने वाले 18वीं सदी के बंगाल के नवाबों के 150 से ज्यादा वंशजों में छोटे नवाब और उनके बेटे और बहू भी शामिल हैं। इनके नाम न्यायिक निर्णय के बाद राज्य की वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। लालबाग मुर्शिदाबाद विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां पर 23 अप्रैल को चुनाव होगा।
लालबाग इलाके में अपने घर में बेड पर बैठे 82 साल के सैयद रजा अली मिर्जा, बंगाल के पूर्व नवाबों की तस्वीरों से सजी दीवार की ओर इशारा करते हैं। स्थानीय तौर पर छोटे नवाब के नाम से जाने जाने वाले रजा और उनके 42 साल के बेटे सैयद मोहम्मद फहीम मिर्जा का नाम भी तार्किक विसंगतियों को दूर करने के लिए वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है।
रेजा और फहीम मीर जाफर के वंशज
रेजा और फहीम, नवाब सिराज उद-दौला की सेना के सेनापति मीर जाफर के वंशज हैं। जाफर 1757 में प्लासी के युद्ध में अंग्रेजों का साथ देने के बाद बंगाल, बिहार और ओडिशा के नवाब बने। रेजा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, “मैं क्या कहूं? मैं हैरान हूं। मेरा नाम, मेरे बेटे का नाम और मेरी बहू का नाम लिस्ट से हटा दिया गया है। लेकिन मेरी पत्नी का नाम लिस्ट में है।”
रेजा ने कहा, “दुख की बात यह है कि मेरी अंतिम इच्छा थी कि मुझे मेरे पूर्वजों के साथ यहीं दफनाया जाए। वोटर लिस्ट से मेरा नाम हट जाने के बाद, मैं कहां जाऊंगा? हमारे पूर्वजों, नवाबों ने मुर्शिदाबाद के कुछ हिस्सों का निर्माण किया है, जिनमें लालबाग भी शामिल है। मैं इसी देश की मिट्टी में दफन होना चाहता हूं।”
रेजा की आंखों में आ गए आंसू
लालबाग के जाफरगंज कब्रिस्तान के बारे में बात करते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए, जहां उनके पूर्वजों की 1100 से ज्यादा कब्रें हैं। स्थानीय सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले और मुर्शिदाबाद नगरपालिका में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद फहीम का कहना है कि दिसंबर में एसआईआर को लेकर सुनवाई के लिए उनके परिवार के सदस्यों को तलब किया गया था।
फहीम ने कहा, “मेरे पिता और मैंने दोनों ने 2002 में मतदान किया था। हमें एसआईआर के दौरान नोटिस मिले और दिसंबर में हम एक स्थानीय सरकारी कॉलेज में सुनवाई के लिए गए। हम लंबी कतार में खड़े थे। लोगों ने हमारा सम्मान किया और चाहते थे कि मेरे पिता सबसे आगे खड़े हों। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हमने सभी दस्तावेज जमा कर दिए। मेरे पिता ने अपने सभी कागजात जमा कर दिए, जिनमें राज्य सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी होने का दस्तावेज भी शामिल था, वहीं मैंने भी अपने दस्तावेज जमा कर दिए, जिनमें मेरी 10वीं क्लास की परीक्षा का एडमिट कार्ड भी शामिल था। लेकिन कुछ दिन पहले जब सप्लीमेंट्री लिस्ट आई तो हमने देखा कि उसमें से हमारे नाम हटा दिए गए थे।”
फहीम ने आगे बताया, “हमारे परिवार के सदस्य बूथ नंबर 121 और 122 में रहते हैं। इन दोनों बूथों के लगभग 1600 वोटर्स में से लगभग 350 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इनमें से लगभग 150 मतदाता हमारे रिश्तेदार और परिवार के सदस्य हैं, जिनके नाम फैसले के बाद हटाए गए हैं। अब हम सभी (न्यायालयों के माध्यम से) फैसले के खिलाफ अपील करने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक उनका गठन नहीं हुआ है।” फहीम ने कहा, “ऑनलाइन ट्रिब्यूनल शुरू हो गए हैं, लेकिन वे कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं कर रहे हैं, इसलिए हम वहां आवेदन नहीं कर रहे हैं और व्यक्तिगत रूप से दस्तावेज जमा करने का इंतजार कर रहे हैं।”
हमें अपने बुनियादी अधिकार से वंचित किया जा रहा है- फहीम
फहीम ने कहा, “आजादी के बाद, जब बंगाल का विभाजन हुआ, तो हमारे पूर्वजों में से एक, सैयद फरादुन जाह को पूर्वी पाकिस्तान जाने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने भारत में ही रहने का फैसला किया। अब, उस व्यक्ति के वंशज होने के नाते, हमें मतदान के अपने बुनियादी अधिकार से वंचित किया जा रहा है।”
बंगाल में मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया 28 फरवरी को खत्म हुई। इसमें फाइनल वोटर लिस्ट में 63 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं और 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं (8.5%) को विचाराधीन रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त किए गए अधिकारी विचाराधीन मतदाताओं की पात्रता की समीक्षा कर रहे हैं। विचाराधीन मामलों की सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले (11 लाख) में है, उसके बाद मालदा (8.28 लाख), दक्षिण 24 परगना (5.22 लाख) और उत्तर 24 परगना (5 लाख) का नंबर है। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, विचाराधीन लगभग 40 लाख मामलों का अब तक निपटारा हो चुका है। इनमें से लगभग 16 लाख नाम हटा दिए गए हैं।
15 दिन बंगाल में ही रहेंगे अमित शाह
पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभाल ली है। गुरुवार को वे शुभेंदु अधिकारी के नामांकन में शामिल होने के लिए भवानीपुर पहुंचे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि वे अगले 15 दिनों तक लगातार पश्चिम बंगाल में रहकर चुनावी कमान संभालेंगे। पढ़ें पूरी खबर…
