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कोरोना पर दो मंत्रालयों में विवाद, MEA ने कहा- लॉकडाउन न होता तो 15 अप्रैल तक होते 8.2 लाख केस, स्वास्थ्य मंत्रालय का इनकार-ऐसी कोई स्टडी नहीं

विदेश मंत्रालय ने वैज्ञानिक अनुमानों का हवाला देते हुए कहा कि अगर सोशल डिस्टेंसिंग के नियम न लागू किए जाते, तो कोरोनावायरस से हर दिन 2.5 लोग संक्रमित होते, लेकिन लॉकडाउन से इसे कम किया गया

राजस्थान के जोधपुर में लॉकडाउन के बीच मास्क पहनकर घरों से बाहर निहारती लड़कियां। (फोटो-पीटीआई)

कोरोनावायरस और लॉकडाउन के असर पर भारत सरकार के दो मंत्रालयों के बीच ही विवाद शुरू हो गया है। हाल ही में विदेश मंत्रालय ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की स्टडी का हवाला देते हुए कहा था कि अगर देश में 21 दिन का लॉकडाउन न लगता, तो 15 अप्रैल तक कोरोनावायरस से संक्रमितों की संख्या 8.2 लाख होती। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि आईसीएमआर ने ऐसी कोई स्टडी ही नहीं की है।

विदेश मंत्रालय की ओर से सचिव विकास स्वरूप ने बुधवार को विदेशी मीडिया के साथ ब्रीफिंग के दौरान कहा, “सबसे जरूरी है महामारी विज्ञानी के तौर पर कहा जाए तो लॉकडाउन ने वायरस के विकास की दर को कम कर दिया है। वैज्ञानिक अनुमानों के मुताबिक, अगर सोशल डिस्टेंसिंग के नियम न लगाए गए होते, तो यह वायरस हर दिन 2.5 लोगों को संक्रमित करता। लेकिन लॉकडाउन की बदौलत हम लोगों का बाहर निकलना और उनकी सामाजिक पहुंच 75% तक कम करने में सफल हो पाए। इससे संक्रमण की गति 0.625 व्यक्ति प्रतिदिन पर ही रह गई।”

स्वरूप ने आगे बताया, “मैं इसे दूसरी तरह रखता हूं। अगर लॉकडान नहीं होता तो 15 अप्रैल तक हमारे पास 8,20,000 केस होते। लेकिन लॉकडाउन की वजह से हमारे पास मौजूदा समय में 6000 मामले ही हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि इस वक्त बड़ी संख्या में मामले स्थानीय स्तर पर हैं। देश के 78 जिलों में ही 80 फीसदी मामले हैं।” बाद में सवाल-जवाब के दौरान जब उनसे आंकड़ों की प्रमाणिकता के बारे में पूछा गया, तो स्वरूप ने बताया कि यह आईसीएमआर की स्टडी पर आधारित हैं।

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हालांकि, जब इसी आईसीएमआर रिपोर्ट के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय से पूछा गया, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जॉइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने कहा, “ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है। कृपया समझें, अगर हम साथ और मेहनत से काम करेंगे, तो सभी केसों को सुलझा सकते हैं। अगर हम गलती करेंगे, तो हम वापस उसी जगह पहुंच जाएंगे, जहां हमें सफल नहीं कहा जाएगा।” अग्रवाल इसके आगे के सवाल को टाल गए।

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लेकिन सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह स्टडी अलग-अलग क्षेत्रों की बाह्य गणना पर आधारित है। जिस आईसीएमआर की रिपोर्ट का हवाला विदेश मंत्रालय ने दिया, सरकार के सूत्रों के मुताबिक, उसके बारे में इसी हफ्ते टॉप लेवल मीटिंग में भी चर्चा हुई थी।

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