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मोदी इफेक्ट! सुबह साढ़े 9 बजे तक दफ्तर पहुंच जा रहे मंत्री, रामविलास पासवान ने ऑफिस में करवाया यह खास इंतजाम

समय पर दफ्तर पहुंचने के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अपनी सभी मीटिंग की समय सारणी में भी बदलाव करवा दिया है।

Author नई दिल्ली | June 19, 2019 3:29 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो- पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर कैबिनेट मंत्री सुबह साढ़े 9 बजे तक अपने-अपने दफ्तर पहुंच रहे हैं। पीएम ने मंत्रियों को सलाह दी थी कि वह समय से दफ्तर पहुंचे और घर से काम करने की आदत से बचें।

इसी सलाह पर समय पर दफ्तर पहुंचने के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अपनी सभी मीटिंग की समय सारणी में भी बदलाव करवा दिया है। उन्होंने पब्लिक मीटिंग का समय कुछ इस तरह निर्धारित करवाया है ताकि वह साढ़े 9 बजे तक दफ्तर किसी भी हाल में पहुंच जाए। उनके समकक्ष उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवन भी सुबह समय पर दफ्तर पहुंचकर ही सचिवों के साथ बैठक कर रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, ज्यादात्तर मंत्रियों ने दफ्तर पहुंचने की साढ़े 9 और 10 बजे तक की ‘डेडलाइन’ बना ली है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों से समय से दफ्तर पहुंचने और घर से काम करने से बचने की सलाह दी थी। हालांकि सरकार में कुछ मंत्री ऐसे भी हैं जो पहले से ही इस व्यवस्था को फॉलो कर रहे हैं। इनमें स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और पर्यावरण और आईबी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का नाम शामिल हैं।

वहीं कैबिनेट में शामिल नए मंत्री भी इस सलाह का पालन कर रहे हैं। जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखवात और अन्य जूनियर मंत्री साढ़े 9 बजे तक दफ्तर पहुंचकर अपना-अपना काम शुरू कर रहे हैं।

पासवान ने महत्वपूर्ण सूचनाओं के आदान-प्रदान और अपडेट के लिए अपने कमरे में एक बड़ी स्क्रीन डैशबोर्ड लगवाई है। वहीं पहली बार मंत्री बने अर्जुन मुंडा (आदिवासी मामले) भी समय से ऑफिस पहुंच रहे हैं। जब से उन्होंने मंत्रालय का चार्ज लिया है उनका स्टाफ में शामिल लोग काफी व्यस्त हैं। वह योजनाओं पर लगातार बारीक नजर रख रहे हैं और अगले सरकार के अगले 100 दिनों के एजेंडा पर काम कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने मंगलवार (18 जून 2019) को अपने दूसरे कार्यकाल के प्रथम बजट से पहले वित्त और अन्य मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए सरकार के 100 दिन के एजेंडा को अंतिम रूप देने पर जोर रहा। बैठक में कम से कम समय में देश को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था कैसे बनाया जाए इस लक्ष्य पर बातचीत हुई।

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