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झारखंड के पुटकी में खदान ढहने से 9 लोगों की मौत, 35-40 से ज्यादा के अब भी फंसे होने की आशंका

मजदूरों को बचाने के लिए राहत और बचाव कार्य शुरू हो चुका है।

Rajasthan, small mines, Rajasthan Mines shut down, Labour unemployed, Rajasthan Mines Labour, Rajasthan Mines Close, Rajasthan NGT Minesचित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

झारखंड के धनबाद जिले के पुटकी बलिहारी इलाके में गुरुवार रात (29 दिसंबर) को एक खदान की छत का कुछ हिस्सा ढह जाने के कारण 9  मजदूरों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि खदान में 35-40 से ज्यादा लोग फंसे हो सकते हैं। ईसीएल एंड डब्ल्यूसीएल के सीएमडी राजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि बचाव दल को अब तक 9  शव मिल चुके हैं । उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर 3 उत्खनन और 7 डंपर मिले हैं। इससे पहले पता चला था कि ड्यूटी पर तैनात सीआईएसएफ का चौकीदार सुरक्षित है और हादसे के 3 घंटे बाद बिजली वापस आ गई थी। मजदूरों को बचाने के लिए पटना से 3 और रांची से एक एनडीआरएफ की टीमें पहुंच चुकी हैं। मुख्यमंत्री रघुबर दास भी घटना पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने मरने वालों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का एेलान किया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दास से इस मामले के बारे में जानकारी ली।

कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के तहत कार्यरत इस खदान की छत का कुछ हिस्सा ढह गया था। जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ठेके पर काम करने वाले चार मजदूर हाइड्रो खदान में लिफ्ट के जरिए केबल लेकर जा रहे थे कि उसी समय छत का एक हिस्सा ढह गया और वे उसके नीचे दब गए। अधिकारी ने बताया कि छत ढहने के कारणों की जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि रात में कोहरे की वजह से बचाव कार्य शुरू नहीं किया जा सका। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) दल दोपहर तक घटनास्थल पर पहुंच सकता है। गोड्डा के पुलिस महानिरीक्षक हरिलाल चौहान ने कहा, “अंदर फंसे लोगों और वाहनों की सही संख्या का पता नहीं चला है। बचाव कार्य शुरू होने के बाद ही इसके बारे में पता चला पाएगा।” स्थानीय लोगों का कहना है कि मिट्टी का ढेर ढहने से मार्ग अवरुद्ध हो गया।खनन कार्य जमीन से लगभग 200 फुट नीचे हो रहा था।

 

 

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