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मनरेगा मजदूरों को देने के लिए पैसों की किल्लत, SSB जवानों को भी सैलरी नहीं

यूपी के सीतापुर में मनरेगा मजदूरों के बीच काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रिचा सिंह का कहना है कि यहां मजदूरों को 12 दिसंबर 2019 के बाद से मजदूरी नहीं मिली है।

MGNREGA, MGNREGA wages, modi govt, additional fund for MGNREGA, Union rural development ministry, finance ministry, SSB salary, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiकेंद्र सरकार की तरफ से 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड की घोषणा का इंतजार है। (फाइल फोटो)

बजट से पहले आर्थिक मोर्चे पर सरकार के लिए अच्छी खबर नहीं आ रही है। पहले सशस्त्र सीमा बल कर्मियों का वेतन और अब मनरेगा के तहत कामगारों का वेतन नहीं मिलने की खबर है। टेलीग्राफ की खबर के अनुसार मनरेगा के तहत काम करने वाले लोगों को दिसंबर महीने से मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है।

महात्मा गांधी न्यूनतम रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करने वाले लाखों लोग अपने वेतन का इंतजार कर रहे हैं। खबर के अनुसार वित्त मंत्रालय ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा के लिए 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड देने पर सहमत हो गया है जबकि आवश्यकता 20 हजार करोड़ रुपये की है।

मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों का वेतन नहीं मिलने के पीछे वजह है कि केंद्रीय ग्रामीण मंत्रालय की तरफ से फंड की कमी की वजह से पैसा रोक दिया है। मंत्रालय की तरफ से सितंबर में मनरेगा के तहत मजदूरी के लिए 20 हजार रुपये के फंड की मांग को लेकर पत्र लिखा गया था।

खबर में वित्त मंत्रालय के दो अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि जनवरी में इस संबंध में बैठक हो चुकी है। बैठक में 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड देने पर सहमति बन चुकी है। इस संबंध में यूपी के सीतापुर में मनरेगा मजदूरों के बीच काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रिचा सिंह का कहना है कि यहां मजदूरों को 12 दिसंबर 2019 के बाद से मजदूरी नहीं मिली है।

वहीं, खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना जैसी स्कीमों से मनरेगा के लिए 6000 करोड़ रुपये का फंड डायवर्ट करेगा। इसके बावजूद भी 20000 करोड़ रुपये की जरूरत पूरी होती नहीं दिख रही है।

मनरेगा के दिशा निर्देशों के अनुसार मनरेगा श्रमिकों के वेतन का भुगतान काम पूरा होने के 15 दिन के भीतर करना होता है। इसमें किसी भी तरह की अतिरिक्त देरी होने पर मुआवजा देने का प्रावधान है। सामाजिक कार्यकर्ता रिचा सिंह का कहना है कि इसके बाद मजदूरी में देरी होने के पीछे केंद्र सरकार की पूरी जिम्मेदारी होती है। मालूम हो कि मीडिया रिपोर्ट में फंड की कमी के कारण एसएसबी जवानों के दो महीनों के वेतन और भत्तों पर रोक की खबर आई थी।

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