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पश्चिम बंगाल की राजनीति तय करेंगे मुसलमान? अपनों के विरोध से भी जूझ रहीं ममता, जानें कितनी बड़ी चुनौती

बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 90 सीट ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक स्थिति में है। जब बंगाल में सीएए का मुद्दा आया तो मुस्लिम वोटर टीएमसी के लिए बहुत कीमती हो गया था। लेकिन अब इन वोटरों के टीएमसी से दूरी ममता बनर्जी के लिए बड़ा खतरा बन गया है।

west bengal politicsकोलकाता में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की बेटी अज़ानिया बनर्जी के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (PTI Photo)

पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में विधान सभा का चुनाव होने जा रहा है। इस बार चुनाव में कौन किस पर भारी पड़ेगा, यह तो मतदान से कुछ दिन पहले ही तय हो सकेगा, लेकिन अभी रोजाना जो नए-नए समीकरण बन रहे हैं उससे राजनीतिक विशेषज्ञ भी हैरान हैं। कल तक जो सीएम ममता बनर्जी के खास थे, आज वे उनका साथ छोड़ रहे थे। अपने-पराए के इस खेल में कौन-किसके साथ है, यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है।

राज्य में मुसलमान वोटर को अपनी ओर मिलाने का भी हर कोई प्रयास कर रहा है। उधर एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी भी मैदान में पूरी ताकत से इंट्री कर लिए हैं। वह अपनी पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत 25 फरवरी को कोलकाता के अल्पसंख्यक बहुल इलाके मटियाबुर्ज में रैली करके करेंगे। हाल ही में बिहार में हुए चुनाव में अपनी पार्टी के अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित ओवैसी बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए जी जान से जुट गए हैं।

वह फिलहाल फुरफुरा शरीफ के मौलवी अब्बास सिद्दीकी के साथ गठबंधन के लिए बातचीत कर रहे हैं। मौलवी अब्बास सिद्दीकी ने हाल ही में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) नाम का एक संगठन बनाया है। सिद्दीकी का बंगाल के मुसलमानों पर काफी प्रभाव है। तीन हजार मस्जिदों के क्षेत्र पर अपना असर रखते हैं। ऐसे में ओवैसी और सिद्दीकी का गठबंधन दूसरे राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ममता से मुसलमानों की दूरी बनाने में सबसे बड़ा वजह सिद्दीकी हो सकते हैं।

दरअसर बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 90 सीट ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक स्थिति में है। जब बंगाल में सीएए का मुद्दा आया तो मुस्लिम वोटर टीएमसी के लिए बहुत कीमती हो गया था। लेकिन अब इन वोटरों के टीएमसी से दूरी ममता बनर्जी के लिए बड़ा खतरा बन गया है।

दूसरी तरफ दो साल पहले 19 जनवरी 2019 को कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में सीएम ममता बनर्जी ने 22 विपक्षी दलों के नेताओं को एक साथ एक मंच पर बुलाकर भाजपा के खिलाफ जो एकजुटता दिखाई थी वह अब खुद ममता के लिए उलटा दिख रहा है। तब 22 दल ममता के साथ थे, अब ममता बनर्जी न केवल अकेली हैं, बल्कि उनकी पार्टी के नेता भी उनको अकेला करते जा रहे हैं।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी आरोप लगा रहे हैं कि इस संकट के लिए ममता बनर्जी खुद ही जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि ममता बनर्जी ने कांग्रेस और लेफ्ट को खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ा है। उनके मुताबिक भाजपा से लड़ने के लिए टीएमसी सक्षम नहीं है। उन्हें कांग्रेस का साथ लेना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

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