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अब 1 जनवरी 1951 होगी असमिया नागरिकता की कटऑफ डेट, 14 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रिपोर्ट के सार्वजनिक होने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा है कि सरकार इसके प्रावधानों को लागू कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र गुवाहाटी | Updated: August 12, 2020 8:58 AM
Assam Accord, CAA, Citizenshipअसम अकॉर्ड के क्लॉज-6 को लागू करवाने से संबंधित रिपोर्ट गृह मंत्रालय की समिति ने फरवरी में सरकार को सौंपी थी।

असम में नागरिकता को लेकर तैयार किए गए असम अकॉर्ड के क्लॉज-6 को लागू करवाने के लिए बनाई गई गृह मंत्रालय की हाई-लेवल कमेटी ने कहा है कि असमिया लोगों की पहचान 1951 को कट-ऑफ साल रखकर तय करनी चाहिए। 14 सदस्यीय कमेटी ने इसी साल फरवरी में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। अब कमेटी के चार सदस्यों ने इसे मंगलवार को प्रेस के सामने रिलीज किया।

असम अकॉर्ड के क्लॉज-6 को लागू करवाने वाली कमेटी के जिन लोगों ने रिपोर्ट रिलीज की है, उनमें 4 में से तीन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के कार्यकर्ता हैं। चौथे शख्स निलय दत्ता हैं, जो कि अरुणाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि असम अकॉर्ड के क्लॉज-6 को लागू करवाने के लिए असमिया लोगों की परिभाषा में स्वदेशी जनजातीय, असम के अन्य स्थानीय समुदायों और 1 जनवरी 1951 से पहले असम में रह रहे भारत के लोगों को शामिल करना चाहिए।

मंगलवार को जारी एक बयान में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रिपोर्ट के बाहर आने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार असम अकॉर्ड के हर क्लॉज को लागू करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पिछली किसी भी सरकार ने इस अकॉर्ड के क्लॉज-6 को लागू करवाने के लिए कमेटी का गठन नहीं किया।

क्या है असम अकॉर्ड का क्लॉज-6?
1985 के असम अकॉर्ड के तहत 24 मार्च 1971 को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप (एनआरसी) के लिए कटऑफ तारीख रखा गया है। यानी इस तारीख से पहले असम में रहने वाले लोग ही असमिया नागरिक माने गए हैं। हालांकि, अकॉर्ड में यह नहीं बताया गया है कि कौन लोग एनआरसी से सुरक्षित होंगे। असम अकॉर्ड के क्लॉज-6 के मुताबिक, असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान को सुरक्षित और सरंक्षित रखने के लिए सभी तरह के संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक सुरक्षाएं दी जाएंगी।

CAA के राज्यव्यापी विरोध के बाद सरकार ने किया था कमेटी का गठन
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के लागू होने के साथ ही पिछले साल असम में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। दरअसल, इसके तहत दूसरे देशों में प्रताड़ित हिंदू, इसाइयों, सिख, बौद्ध और जैनों को भारत की नागरिकता का रास्ता साफ हो जाता है। ऐसे में असम में लोगों ने एक बार फिर इस कानून से अपनी पहचान पर खतरा होने का अंदेशा जताया था और सड़कों पर प्रदर्शन किए थे। तब सर्बानंद सोनोवाल सरकार ने असम की स्थानीय संस्कृति को सुरक्षित करने वाले क्लॉज-6 को जल्द से जल्द लागू करवाने का वादा किया था।

रिपोर्ट में असमिया लोगों के लिए क्या अधिकार?
क्लॉज-6 लागू करवाने से जुड़ी रिपोर्ट इसी साल फरवरी में केंद्र सरकार को दी गई थी। इसमें असमिया लोगों के लिए कई तरह के रिजर्वेशन का ऐलान किया गया है। खासकर लोकसभा में असम से आने वाली सीटों के 80-100 फीसदी शेयर पर असमिया लोगों का हक, विधानसभा और स्थानीय संस्थाओं में आरक्षण। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट सेक्टर की भर्तियों में भी 70-100 फीसदी आरक्षण।

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