कोरोना काल में MGNREGS बना सहारा, रेकॉर्ड 11 करोड़ लोगों को मिला रोजगार

साल 2020-21 में MGNREGS के तहत 11 करोड से ज्यादा लोगों ने काम किया। यह आंकड़ा अब तक का सबसे बड़ा है। पिछले साल के मुकाबले भी यह 41 फीसदी ज्यादा है।

MGNREGS
ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के तहत गांव लौटे लोगों को मिला रोजगार। फोटो- एक्सप्रेस फाइल

कोरोना महामारी को रोकने के लिए जब लॉकडाउन लगा तो लाखों प्रवासी मजदूर अपने गांवों की तरफ चल पड़े। उन्हें यह तो नहीं बता था कि गांव में रोजगार मिलेगा या नहीं लेकिन इतना जरूर पता था कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो जाएगा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम (MGNREGS) ने लोगों को बहुत बड़ा सहारा दिया।

साल 2006-07 में इस स्कीम की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से अब तक इतने मजदूरों ने कभी इस योजना में काम नहीं किया। साल 2020-21 में 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को MGNREGS के तहत रोजगार मिला। अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक कुल 11.17 करोड़ लोगों ने इसमें काम किया। पिछले साल के मुकाबले 41 प्रतिशत ज्यादा लोग इसमें शामिल हुए। एक साल पहले 7.88 करोड़ लोगों ने इस स्कीम के तहत काम किया था।

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद हर साल 6.21 से 7.88 करोड़ तक लोगों को रोजगार मिला। कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार चले गए और ऐसे में गांव लौटने के बाद MGNREGS ही सहारा रह गया। इसीलिए लगभग 3 करोड़ लोग ज्यादा इस स्कीम में शामिल हो गए। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-21 में लगभग 7.54 करोड़ परिवारों को इस योजना में रोजगार मिला। यह आंकड़ा भी पिछले साल के मुताबिक 37 प्रतिशत ज्यादा है।

इस योजना के तहत 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाता है। इसे साल 2006-7 में 200 अत्यंत पिछड़े जिलों से शुरू किया गया था। साल 2020-21 में 385.89 करोड़ पर्सन डे काम किया गया। यह भी एक साल पहले के मुकाबले 45 प्रतिशत ज्यादा है। बता दें कि कोरोना एक बार फिर सिर उठा रहा है और 6 महीने पहले जितने केस आ रहे थे, उतने ही आने लगे हैं। ऐसे में अभी शहरों में ज्यादा रोजगारों की उम्मीद नजर नहीं आ रह है। इस कठिन परिस्थिति में MGNREGS गांव के लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा है।