केंद्र सरकार ने मनरेगा की जगह लागू हुए नए ग्रामीण रोजगार कानून के तहत मजदूरों की नई दैनिक मजदूरी दरें जारी कर दी हैं। नए नियम बुधवार (1 जुलाई 2026) से लागू हो गए हैं। इसके तहत राज्यों के हिसाब से मजदूरी 300 रुपये से 409 रुपये प्रतिदिन तय की गई है जबकि सिक्किम की कुछ ग्राम पंचायतों में यह 450 रुपये होगी।

विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM (G)] अधिनियम, 2025 के तहत अकुशल श्रमिकों की नई दैनिक मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी कर दी। यह नया कानून मंगलवार से लागू हो गया है और इसने करीब 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 की जगह ले ली है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न राज्यों में अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 300 रुपये से 409 रुपये के बीच तय की गई है। वहीं, सिक्किम की कुछ ग्राम पंचायतों में विशेष रूप से 450 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित की गई है।

नई दरों के तहत अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, असम, त्रिपुरा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।

किस राज्य में कितनी मिलेगी दिहाड़ी

केंद्र सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना के अनुसार 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 300 रुपये तय की गई है। इनमें गुजरात, मणिपुर, मिजोरम, राजस्थान, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, मेघालय, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश (गैर-अनुसूचित क्षेत्र), अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड शामिल हैं।

अन्य राज्यों के लिए मजदूरी दरें अलग-अलग तय की गई हैं। तेलंगाना में 308 रुपये, आंध्र प्रदेश में 312 रुपये, महाराष्ट्र में 317 रुपये, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में 340 रुपये, तमिलनाडु में 345 रुपये, पुडुचेरी में 347 रुपये, अंडमान (अंडमान जिला) और लक्षद्वीप में 348 रुपये, पंजाब में 360 रुपये, अंडमान (निकोबार जिला) में 367 रुपये, हिमाचल प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में 375 रुपये, कर्नाटक में 382 रुपये, केरल में 401 रुपये और गोवा में 406 रुपये प्रतिदिन मजदूरी तय की गई है।

वहीं, सिक्किम की तीन ग्राम पंचायतों- ग्नाथांग, लाचुंग और लाचेन में विशेष परिस्थितियों को देखते हुए 450 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित की गई है।

मनरेगा की मजदूरी नहीं बढ़ी

सरकार की ओर से जारी नई मजदूरी दरें मनरेगा की मौजूदा मजदूरी से अधिक नजर आ रही हैं लेकिन इसकी मुख्य वजह यह है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मनरेगा की मजदूरी में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।

केंद्र सरकार ने मनरेगा की आखिरी मजदूरी दर 27 मार्च 2025 को अधिसूचित की थी जो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लागू थी। इसी दर को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भी जारी रखा गया।

सरकार का कहना है कि यदि इस वित्त वर्ष के लिए मनरेगा की मजदूरी बढ़ाई गई होती तो नए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत घोषित मजदूरी में बढ़ोतरी भी उसी के अनुरूप होती।

नए कानून की धारा 10 के तहत केंद्र सरकार को अकुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से मजदूरी तय करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही, कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई योजना के तहत तय की गई मजदूरी मनरेगा के तहत लागू मजदूरी से कम नहीं हो सकती।

VB-G RAM G: नई योजना और रोजगार की चुनौतियां, क्या नाम बदलने से सार्थकता साबित होगी?

भारत तरक्की कर रहा है, आंकड़ों से अर्शशास्त्री यही बताते हैं। निस्संदेह भारत दुनिया की बड़ी आर्थिक महाशक्ति है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में देश तीसरी आर्थिक महाशक्ति बन जाएगा और 2047 में जब आजादी का शताब्दी वर्ष मनाएंगे, तब हम पूरी तरह से एक विकसित राष्ट्र होंगे। उस समय हर आदमी यथोचित रोजगार के साथ अच्छा भोजन करेगा, अच्छा पहनेगा और खुशहाली के शिखर पर होगा। यह है सपना। पढ़ें पूरी खबर