जिस पैनल ने जामिया वीसी की नियुक्ति की सिफारिश की थी, उसी के मेंबर ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी- ‘नजमा अख्तर को हटाइए’

जामिया की पहली महिला कुलपति नजमा अख्तर ने तीन महीने पहले दक्षिणी दिल्ली में सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के बाद जामिया परिसर में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की थी।

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. नजमा अख्तर। (एक्सप्रेस फोटो- ताशी तोबग्याल)

साल 2018 में जिस सर्च कमेटी ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कुलपति पद के लिए डॉ. नजमा अख्तर का नाम सुझाया था, उसी कमेटी के एक सदस्य ने अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को खत लिखकर कार्यरत वीसी नजमा अख्तर की नियुक्ति को रद्द करने की मांग की है। सर्च कमेटी के सदस्य रामकृष्ण रामास्वामी ने 8 मार्च को राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में दावा किया है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने 10 जनवरी, 2019 को एक कार्यालय ज्ञापन (ओएम) में अख्तर को विजिलेंस क्लीयरेंस देने से इनकार कर दिया था।

रामास्वामी ने अखबारों की रिपोर्टों के हवाले से दावा किया कि सीवीसी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन आने वाले किसी भी संस्थान या विश्वविद्यालय में सेवानिवृत्ति के बाद नजमा अख्तर को फिर से किसी तरह का पद, रोजगार या काम देने पर विचार नहीं करने की सिफारिश की थी। हालांकि, उनकी चिट्ठी यह नहीं बताती है कि सीवीसी की आपत्ति क्या थी और उसने अख्तर को विजिलेंस क्लियरेंस देने से से इनकार क्यों किया?

जामिया की पहली महिला कुलपति नजमा अख्तर ने तीन महीने पहले दक्षिणी दिल्ली में सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के बाद जामिया परिसर में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की थी। दिल्ली पुलिस ने जामिया यूनिवर्सिटी में घुसकर न केवल छात्रों की पिटाई की थी बल्कि लाइब्रेरी में घुसकर सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए थे।

15 दिसंबर, 2019 की पुलिसिया कार्रवाई की वीसी ने आलोचना करते हुए एक वीडियो मैसेज जारी किया था, जिसमें उन्होंने छात्रों के साथ खड़े होने की बात कही थी। इसके अगले दिन वीसी ने एक प्रेस कॉन्प्रेन्स बुलाई, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें घेर लिया। इस पीसी में वीसी ने दोहराया कि जामिया परिसर में बिना इजाजत के दिल्ली पुलिस का प्रवेश करना और उसकी कार्रवाई दोनों निंदनीय है।

जामिया के वीसी की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी का गठन 17 अक्टूबर, 2018 को किया गया था। उसी वर्ष 6 नवंबर को इसकी पहली बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें 107 उम्मीदवारों में से 13 उम्मीदवारों को चुना गया था। राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र में रामास्वामी ने कहा है कि पैनल द्वारा अख्तर को चुना गया था। उन्होंने लिखा है, “28 नवंबर, 2018 को 13 शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों के साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने के बाद, तीन नामों के पैनल की एक सिफारिश नियुक्ति के लिए (विजिलेंस क्लियरेंस के बाद) आपको (राष्ट्रपति) भेजी गई थी। राष्ट्रपति ने 11 अप्रैल, 2019 को इस पद के लिए नजमा अख्तर के नाम को मंजूरी दी थी।

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