J&K: कश्मीरी दोस्त को छुड़ाने के लिए लड़ रहा यह विश्व हिंदू परिषद नेता, बोला- इंसानियत से काम लीजिए

चार अगस्त की रात से यानी जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों के निरस्त होने और प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने से पहले सैकड़ों लोगों को घाटी में जगह-जगह पर हिरासत में लिया गया। इनमें अलगाववादी, मुख्यधारा के राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, ट्रेड एसोसिएशन के नेता और पत्थरबाज शामिल हैं।

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तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

नॉर्थ कश्मीर टाउन में सरकारी गेस्ट हाउस के बाहर एक अनुचित दृश्य सामने था। अमृतसर विश्व हिंदू परिषद के सदस्य राकेश खन्ना उन्हें लोहे के काले दरवाजों के दूसरी तरफ जाने देने के लिए गार्ड्स से विनती कर रहे थे। चूंकि उनके दोस्त और हंदवाड़ा मार्केट एसोसिएशन
के अध्यक्ष अजीज अहमद सोफी हिरासत में हैं।

चार अगस्त की रात से यानी जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों के निरस्त होने और प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने से पहले सैकड़ों लोगों को घाटी में जगह-जगह पर हिरासत में लिया गया। इनमें अलगाववादी, मुख्यधारा के राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, ट्रेड एसोसिएशन के नेता और पत्थरबाज शामिल हैं। अभी तक इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है कि कुल कितने लोगों को हिरासत में लिया गया।

मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष और पूर्व विधायक के बेटे सोफी को 9 अगस्त को हिरासत में लिया गया। गेस्ट हाउस के गेट के बाहर खड़े अमृतसर मार्केट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और एक अन्य संगठन के सदस्य खन्ना अनुच्छेद 370 को रद्द करने की मांग करने वालों में सबसे मुखर थे। उन्होंने गार्ड्स से कहा कि 29 वर्षीय सोफी उनका दोस्त है और उनके परिवार के सदस्य की तरह है।

खन्ना अपने पिता के समय से कश्मीर में पारिवारिक व्यवसाय के अलावा एक किराना और कपड़ा व्यापारी भी है। उन्होंने अपना फोन बाहर निकाला और एक तस्वीर में खुद को आरएसएस शाखा में दिखाया। खन्ना ने कहा कि हाल में हुए लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के पक्ष में प्रचार किया था। वह कुछ साल पहले अमृतसर में एक कपड़ा मेले पाकिस्तान स्टॉल को ध्वस्त करने में भी शामिल थे। राकेश खन्ना ने कहा, ‘सबकुछ ठीक चल रहा था। मैं अपने व्यापार की वजह से एक महीने के लिए श्रीनगर में किराए के घर में रहता हूं। हालात शांतिपूर्ण हो गए थे। पर्यटकों का आना शुरू हो गया था। अब सारा काम फिर से खराब।’

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खन्ना ने कहा कि वह अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के समर्थन में थे। मगर यह तरीका नहीं था। उन्हें कुछ महत्वपूर्ण लोगों तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए थी। मुख्यधारा के नेताओं के अलावा यहां अन्य नेता भी हैं, मगर उन्होंने सभी को गिरफ्तार कर लिया है। खन्ना के मुताबिक, ‘देश को मजबूत जरूर बनाओ। मैं इसके खिलाफ नहीं हूं। मगर इंसानियत से काम लेना चाहिए था। निर्दोष लोगों को जेल में क्यों डाल दिया। ये नाजायज है। फिर फोन भी काट दिया। देखिए सभी बाजार कैसे बंद हैं। लोग परेशान हैं। अमरनाथ यात्रियों को भी वापस भेज दिया।’

सोफी की पत्नी रूकईया ने खन्ना से मदद मांगी थी। खन्ना ने बताया, ‘प्राइवेट कारवाले से लिफ्ट मांगकर मैं किसी तरह श्रीनगर से यहां पहुंचा। वह और उनके बच्चे कई दिनों से अपने पति से मिलने की कोशिश कर रहे थे। मगर अभी तक उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई।’

सोफी एक संपन्न परिवार से हैं। बेटा दिल्ली में आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा है। दो बेटियां श्रीनगर में पढ़ती हैं। अपने घर पर रूकईया ने बताया, ‘चार अगस्त की रात को पुलिस पति को खोजते हुए घर पहुंची और घर के हर कमरे में उन्हें खोजा।’ रूकईया के मुताबिक वो एक बार फिर आए और सोफी तब तक घर आ चुके थे। जिन्होंने बताया, ‘मेरे पास कोई बंदूक नहीं है। मैं अंडरग्राउंड नहीं हूं। फिर घर पर छापा मारने का नाटक क्यों? मैं पुलिस स्टेशन जा रहा हूं और उनसे खुद को गिरफ्तार करने के लिए कहूंगा।’

जिस गेस्ट हाउस में सोफी को रखा गया वो अब सीआरपीएफ कैंप में तब्दील हो चुका है। दोस्त को छुड़ाने के लिए खन्ना ट्राउजर और शर्ट पहने हुए व सोने के रंग का चश्मे पहने गेट के बाहर खड़े थे। यहां कुछ अन्य कश्मीरी भी थे जो हिरासत में रखे गए अपने पारिवारिक सदस्यों से मिलने के लिए गेट के बाहर खड़े थे। खन्ना ने भारी संख्या में गेट के बाहर तैनात गार्ड्स से कहा, ‘वो मेरे दोस्त हैं और एक भाई की तरह हैं। वह तो एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, उनकी पत्नी बीमार हैं और बच्चे रो रहे हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में किसी को परेशान नहीं किया।’

खन्ना ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘सोफी की एकमात्र यही गलती थी कि उन्होंने कुछ साल पहले श्रीनगर में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। जिसका एक वीडियो भी है जो हाल में सामने आया। अब अगर कोई एक दो नारे लगाता है तो क्या बड़ी बात है? किसने ऐसा नहीं किया है?’

बता दें कि गेट के बाहर खड़े गार्ड्स ने खन्ना को समझाते हुए कहा कि उन्हें किसी बाहरी को अंदर जाने देने की अनुमति नहीं है। अगर उन्हें अंदर जाना है तो हंदवाड़ा पुलिस स्टेशन के एसएचओ से एक लेटर लिखवाकर लाना होगा। हालांकि वो सोफी को गेट तक लाने के लिए तैयार हो गए। वह बड़े से गेट के पीछे खड़े थे और उनका सिर्फ सिर दिखाई दे रहा था। इस दौरान खन्ना ने सोफी को उनकी पत्नी, मां और बच्चों की जानकारी दी।

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